कसया/कुशीनगर । अहिरौली राजा में संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन अयोध्या से पधारे आचार्य पंडित आनंद भारद्वाज ने कहा कि संसार में भगवान कृष्ण ही सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करते हैं।
भगवान के चरणों में जितना समय बीत जाए उतना अच्छा है। इस संसार में एक-एक पल बहुत कीमती है। जो बीत गया सो बीत गया। इसलिए जीवन को व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहिए। भगवान द्वारा प्रदान किए गए जीवन को भगवान के साथ और भगवान के सत्संग में ही व्यतीत करना चाहिए।उन्होंने कहा कि भागवत प्रश्न से प्रारंभ होती है और पहला ही प्रश्न है कि कलयुग के प्राणी का कल्याण कैसे होगा। इसमें सतयुग, त्रेता और द्वापर युग की चर्चा ही नहीं की गई है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि बार-बार यही चर्चा क्यों की जाती है, अन्य किसी की क्यों नहीं। इसके कई कारण हैं जैसे अल्प आयु, भाग्यहीन और रोगी।इसलिए इस संसार में जो भगवान का भजन न कर सके, वह सबसे बड़ा भाग्यहीन है। भगवान इस धरती पर बार-बार इसलिए आते हैं ताकि हम कलयुग में उनकी कथाओं में आनंद ले सकें और कथाओं के माध्यम से अपना चित्त शुद्ध कर सकें। व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो।
कथा के मुख्य यजमान मार्कण्डेय मिश्रा, पंडित रणजीत मिश्रा,पंडित हरिओम द्विवेदी, पवन तिवारी, रितेश दूबे, पंडित बिकास पांडेय,पंडित अमित पांडेय,अरबिन्द मिश्रा,सचिदानंद मिश्रा,नित्यानंद मिश्रा,सिद्धांत मिश्रा, शशांक मिश्र,कृष्णा मिश्रा, राधेश्याम जयसवाल,अच्छे लाल जयसवाल, बिजय मिश्रा, गुलाब यादव, महेश जयसवाल आदि मौजूद रहेl
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