रामकोला/कुशीनगर (न्यूज अड्डा)। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक कप्तानगंज गन्ना विकास परिषद रामकोला पी0 के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक नरेन्द्र कुमार सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से परिक्षेत्र के किसानों को जानकारी दी है कि भौगोलिक स्थिति के अनुसार इस क्षेत्र सहित जनपद अन्तर्गत मुख्य रूप से गन्ना, धान, गेहूं केले आदि की खेती किया जाता हैं। कुशीनगर जनपद का मुख्य फसल गन्ना है, लेकिन विगत 2 वर्षों से गन्ने की फसल सूखने की वजह से उत्पादन कम होने के कारण किसान भाइयों को काफी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।उन्होंने दावा किया है कि गन्ने की वैज्ञानिक प्रबंधन कर हम इस आर्थिक क्षति को न्यूनतम कर सकते हैं।एससीडीआई श्री सिंह ने सुझाव दिया है कि- किसान भाई अपने भूमि का वर्गीकरण जलजमाव के आधार पर करें,फसलों से सर्वाधिक लाभ लेने के लिए अनुमानित वर्षा की जलमग्नता की आकलन कर फसलों का चयन करें, बीज विस्थापन:- सर्वाधिक प्लाट को० 238 के प्लाट ज्यादा सूखे हैं एवं रोग बीमारियों तथा लाल सड़न रोग से सर्वाधिक नुकसान इसी प्रजाति के प्लाटों में हुआ है।इस प्रजाति का बीज विस्थापन को०पी० 9301 ,यू०पी०5125,सी०ओ० 98014,को०शा० 13235 ,को०लख०14201,को०15023 आदि जैसे उन्नत प्रजातियों से करें। उन्होंने फसल चक्र को महत्वपूर्ण बताया है एवं दलहनी फसलों का समावेश फसल चक्र में करने की सलाह दी है।रोग ग्रसित फसल के अवशेषों को चक रोड पर न रख जलाने की बात कही है,कहा कि मृदा उपचार व कट मुक्त बीज का चयन करना चाहिए। प्रत्येक कृषक के पास कम से कम 4-5 प्रजाति का गन्ना बीज उपलब्ध होना चाहिए।उसमें से 60% बुवाई अगेती प्रजाति से एवं 40% बुबाई सामान्य एवं देर वाली किस्मों से करना चाहिए। गन्ना बीज उपचार- गन्ने के बीच को बुवाई से पूर्व हेक्सास्टॉप, बावस्टीन, मैनकोज़ेब आदि में से किसी एक रसायन के 0.1% भूल से बीज को उपचारित कर लेना चाहिए।गन्ने में समय से ट्राइकोडरमा का उपयोग लेना चाहिए ।जलनिकास का समुचित ध्यान रखना चाहिए।
एससीडीआई श्री सिंह ने अन्य तमाम जानकारी देते हुए कहा है कि उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखते हुए यदि गन्ने की खेती का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए, तो निश्चित रूप से आप अपने लागत को कम करते हुए अधिकतम लाभ को प्राप्त कर सकते हैं।
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