रामकोला/कुशीनगर । रामकोला क्षेत्र के पपउर गांव में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पं देवानंद त्रिपाठी महाराज ने परीक्षित का जन्म एवं शुकदेव जी की कथा सुनाई जिसे सुनकर श्रोता आत्म विभोर हो गये।
कथावाचक ने श्रोताओं को बताया कि युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने पर क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। ब्रह्मास्त्र लगने से अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित बड़े होकर सुख वैभव से समृद्ध प्रतापी राजा बने।
कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य ने बताया साठ वर्ष की अवस्था में राजा परीक्षित क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए।अपने पिता के गले में मृत सर्प को देख मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने भी मेरे पिता के गले में मृत सर्प डाला है। उसकी मृत्यु सात दिनों के अंदर सांप के डसने से हो जाएगी। ऐसा ज्ञात होने पर राजा परीक्षित ने विद्वानों को अपने दरबार में बुलाया और श्राप से मुक्ति के लिए उनसे राय मांगी।
उस समय विद्वानों ने उन्हें शुकदेव जी का नाम सुझाया फिर शुकदेव जी का आगमन हुआ। शाम सात बजे कथा विश्राम के बाद श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ की आरती उतारी। इस दौरान यजमान सुरेद्र नरायन पान्डेय, शिवपूजन पान्डेय, शारदा नंद पांडेय, चद्रभूषण पान्डेय, राजेश पान्डेय, अरूण पान्डेय, विनय पांडेय, मनोज पान्डेय, देवेद्र सत्यम, रामबच्चन, राजेन्द्र राव, राजा राम राव, कैलाश गुप्ता, बलिराम राव, रामेश्वर राव, प्रद्युम्न सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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