कसया/कुशीनगर। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भापुस) कुशीनगर क्षेत्र अंतर्गत आने वाला संरक्षित क्षेत्र जो पड़रौना माउंट के नाम से जाना जाता है। अब पर्यटकों को लुभाएगी। इसके कायाकल्प को लेकर भापुस ने कार्य योजना तैयार की है और इसके संरक्षण के लिए चहारदीवारी कराई जाएगी।
पड़रौना छावनी से सटे 200 मीटर के करीब पूरब की ओर जाने वाले मार्ग के दक्षिण आबादी से सटे बुद्धकालीन इस भू भाग पर पुरातत्व विभाग द्वारा तीन नोटिस बोर्ड चेतावनी स्वरूप लगाए गए हैं और विनियमित क्षेत्र के भीतर 100 मीटर, 200 मीटर, 300 मीटर के दायरे को प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के अनुसार संरक्षित किया गया है। अभी पूरा भू भाग घास, झाड़ियों से पटा है। अब इसके कायाकल्प की तैयारी में भापुस है।
इसके संरक्षण को लेकर बौद्ध संगठनों के राष्ट्रीय समन्वय द्वारा भी मांग उठाई जाती रही है। इसके विकास से पड़रौना बौद्ध परिपथ से जुड़ जाएगा और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र विंदु भी होगा। इस संबंध में सहायक संरक्षण अधिकारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कुशीनगर शादाब खान ने बताया कि इस क्षेत्र को जल्द ही चहारदीवारी बनाकर संरक्षित किया जाएगा। इसकी तैयारी हो चुकी है। उत्खनन आदि के सवाल पर कहा कि पड़रौना माउंट के विकास के लिए विभाग से जिस तरह का दिशा निर्देश होगा उसी अनुरूप कदम उठाए जाएंगे। इसको लेकर रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
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