रामकोला/कुशीनगर । मधुर साहित्य सामाजिक काव्य संस्था की 106 वीं कवि गोष्ठी रामकोला नगर पंचायत के अटल नगर वार्ड (अमवा बाजार) में कवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ के आवास पर संपन्न हुई। कवि गोष्ठी में ‘सावन साहित्य सेवा सदन’ के द्वारा हिन्दी और भोजपुरी के वरिष्ठ कवि मधुसूदन पांडेय ‘मधुर’ को उनके काव्य संग्रह मधुरामृत के लिए शब्द श्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि भोजपुरी कवि उगम चौधरी मगन ने भ्रूण हत्या की ओर संकेत करते हुए ‘माई बेटी जनम बड़ा सुनर, माहुर देइ जनि मार…’ सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया। मंच संचालक अशोक शर्मा ने ‘फिर एक रामचंद वसुधा को चाहिए’ सुनाकर वाहवाही लूटी तथा मधुसूदन पांडेय ने ‘वाणी में दम जेकरे काम बनि जाई, जे बा सरल ओकर मुंहवे नोचाई’ तथा बलराम राय ने ‘अपना शहर वो शहर हो गया है, जो था खबर, बेखबर हो गया है’ सुना कर कवि गोष्ठी को नई ऊंचाई प्रदान की। सुरेंद्र प्रसाद गोपाल ने ‘क्यों विवश हो खुद की पीठ थपथपाने को’ तथा असलम बैरागी ने ‘उड़ जाई हंसा निकल जाइ गहना’ सुनाकर तालियां बटोरी।
सुनील चौरसिया’सावन’ ने अपने काव्य संग्रह ‘हाय री! कुमुदिनी’ से ‘महत्त्व’ नामक कविता ‘भूत-भविष्य की चक्की में पिस रही ज़िंदगी आदि परोस कर ‘सावन साहित्य सेवा सदन’ की स्थापना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके अंतर्गत निरन्तर कवि सम्मेलन, अनाथ एवं दिव्यांग छात्राओं को पाठ्य सामग्री प्रदान कर उन्हें शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करने हेतु यथा संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। विद्यार्थियों के मन में हिन्दी साहित्य के प्रति रुचि जागृत करने हेतु निबंध लेखन, कविता लेखन इत्यादि करायी जायेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता शायर नूरुद्दीन नूर ने की। जगदीश कुशवाहा ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की। रामकेवल चौरसिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सुप्रीति चौरसिया, राधा, संदीप, शैलेंद्र, राम प्रसाद, प्रियंका, सोना, उर्मिला देवी इत्यादि श्रोताओं की गरिमामय उपस्थिति रही।
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