रामकोला/कुशीनगर। रामकोला नगर से सटे धर्मसमधा माता की दरबार है,जहां आप पहुँचेगे तो आपके कानों में हरे रामा-हरे रामा, हरे कृष्णा-हरे कृष्णा का शब्द घोष गूंजने लगेगा, आप कहेंगे कि इसमें क्या नयी बात है, चैत के महीने में रामनवमी के आसपास तो इसी तरह के हर जगह लोग अष्टयाम कीर्तन का आयोजन करते हैं। इन आयोजनों में तीन दिन से लेकर पंद्रह दिन तक लगातार अलग-अलग धुन और शैली में हरे राम-हरे कृष्ण मंत्र को गाते रहते हैं, मगर जब आपको पता चलेगा कि यह कोई तीन, सात, नौ या पंद्रह दिनवाला अष्टयाम नहीं है।
यह अष्टयाम पिछले साल 18 नवम्बर से हर गुरूवार को रात साढ़े सात बजे से साढ़े नौ बजे तक चलता है। इसे शुरू करने वाले धर्मसमधा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चन्द्रिका,रामप्रताप यादव,सतीश कुमार,दीनानाथ, असलम अंसारी, राजू यादव, बैजनाथ खरवार,अजय प्रजापति समेत आदि क्षेत्रवासियों ने ठान लिया है कि परिसर अन्तर्गत सती माता के दरबार में माता रानी की कृपा से यह सदा चलता रहेगा।आस पास के गाँव वाले गुरूवार की शाम को आते है और बैठ कर दो घंटा हरे राम-हरे कृष्ण का भजन करते हैं। सती माता के दरबार के पुजारी त्रिलोकी नाथ मिश्रा कहते हैं कि अब ईश्वर की मरजी, कीर्तन गांव-समाज के लोग ही करते हैं। कीर्तन करके उठने केे बाद सभी लोग प्रसाद ग्रहण कर अपने-अपने घर चले जाते हैं ।पपउर के पूूर्व प्रधान प्रतिनिधि सुनील सिंह का कहना है कि शाम को इधर-उधर और कउड़ा बैठकर समय बिताने से अच्छा है कि माता रानी के दरबार में कीर्तन कर लिया जाय।
यह हरिनाम संकीर्तन हर गुरूवार को होता है।इसमें शामिल होने वाले हर किसी के मन में इस बात का विश्वास है कि यह आगे भी इसी तरह लगातार निर्बाध चलता रहेगा।
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