पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में उपभोक्ताओं के साथ सीधे संपर्क में होने के कारण और उपभोक्ताओं के गलत बिल संबंधी समस्या के निवारण हेतु उपभोक्ताओं को सही बिल मिले इसके लिए लगातार जूनियर इंजीनियर संगठन लगातार प्रयास कर रहा है।
पूर्वांचल के आरएपीडीआरपी टाउन और नॉन आरएपीडीआरपी टाउन में बिलिंग एजेंसी द्वारा उपभोक्ता के परिसर पर जाकर बिल निकाला गया है? या अपने कार्यालय में बैठकर फर्जी बिल निकाला गया है? इसका सत्यापन या तो उपभोक्ता से की जा सकती है या फिर हर माह एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए बिल के लेजर से अक्षांश – देशांतर (latitute – longitude) के आधार पर रैंडम चेक किया जा सकता है
आज के तकनीकी युग में हर एक उपभोक्ता के घर पर जाकर जांच करना संभव नहीं है।इसलिए बिल में लोकेशन का latitude – longitude का कॉलम दिया गया है।
परंतु संज्ञान में आया है की आरएपीडीआरपी टाउन में अक्षांश – देशांतर (latitute – longitude) के कॉलम को खाली रखा गया है,जबकि माह जनवरी 2021 में “बिलिंग लोकेशन ट्रैकिंग टूल्स” का representation जूनियर इंजीनियर संगठन उत्तर प्रदेश के केंद्रीय अध्यक्ष ई०जी०वी०पटेल जी के नेतृत्व में संगठन का एक प्रतिनिधि मंडल तत्कालीन अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड शक्ति भवन लखनऊ अरविंद कुमार को दिया था और उनके द्वारा तत्काल आरएपीडीआरपी टाउन में अक्षांश – देशांतर (latitute – longitude) को खोलने हेतु अधीक्षण अभियंता (सूचना एवं प्रौद्योगिकी) शक्ति भवन ई०ए०पी०सिंह को निर्देश दिया गया था और कुछ दिन तक लेजर में latitude -longitude को खोला गया परंतु जब जूनियर इंजीनियर जांच करके फर्जी बिलिंग संबंधी शिकायत अधिकारियों से करने लगा तो इसको पुनः बंद कर दिया गया।
अब उपभोक्ताओं को एमयू बेस बिल मिले इसकी जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर की है। हाई लाइन लॉस पर सबको चार्ज शीट मिल रही है, बिल सही करने के लिए उपखंड अधिकारी अधिशाषी अभियंता तक दिन रात परेशान है,लेकिन जिसके कारण सही बिल नहीं मिल रहा है। उसके विरुद्ध प्रबंधन कोई कार्यवाही करने को तैयार नहीं है।
हर माह करोड़ों रुपए का फर्जी भुगतान किया जा रहा है। प्रबंधन का ध्यानाकर्षण के लिए जूनियर इंजीनियर संगठन पिछले 2 दिन से पूर्वांचल के सभी जनपदों में सत्याग्रह ध्यानाकर्षण कार्यक्रम किया, परंतु अभी भी प्रबंधन आंख,कान बंद करके बिलिंग एजेंसी को मलाई देने में लगा है।तो निश्चित ही पूर्वांचल क्या अपितु पूरे प्रदेश का बिजली निगम को घाटे में जाना तय है।
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