तमकुही। भारद्वाज मुनि के यह प्रश्न करने पर कि राम कौन हैं, याज्ञवल्क्य ने उन्हे संवाद के रूप में राम कथा सुनाई। शिवजी ने भारद्वाज निवेदन कर राम कथा सुनी। अतएव रामचरित मानस बातचीत नहीं संवाद है, विवाद नहीं प्रार्थना है ,अभ्यर्थना नहीं निवेदन है।
यह बातें तमकुही विकास खंड के ग्राम पंचायत बरवाराजापाकड़ के सपही बरवा टोला में विगत छह वर्षों से आयोजित होने वाले राधा अष्टमी महोत्सव के निमित्त आयोजित रामकथा के दूसरे दिन शुक्रवार की रात कथावाचक आचार्य विनय पांडेय कही।
कथाक्रम मे कथावाचक ने कहा कि सती दहन के बाद भगवान शिव सत्तासी हजार वर्ष के लिए समाधि में चले गए ऊधर सती का जन्म पार्वती के रूप में राजा हिमाचल के यहां हुआ। तारकासुर का अंत करने के लिए देवताओं ने शिव जी की विवाह की योजना बनाई और प्रभु राम का आदेश मानकर भोलेनाथ ने विवाह करना स्वीकार किया। देवताओं ने कामदेव को शिव जी के पास भेजा। शिव की समाधि टूटी तो कामदेव जलकर भस्म हो गया। पार्वती मैया को खबर हुई मां पार्वती समझ गई की शिव जी के वश में कामदेव है। ऐसा सौभाग्य सब को नहीं मिलता।
धूमधाम से शिव पार्वती विवाह संपन्न हुआ। प्रसंग सुन कथा पंडाल में उपस्थित श्रोता झूम उठे। पं. दीपक मिश्र ने वाल्मीकि रामायण का परायण पाठ किया। बिहार में शिक्षिका अंजली मिश्रा ने व्यास पूजन किया। सुरेश साधु, नंदकिशोर गुप्ता, राघव, कलावती,सुभावती,सोनी,नन्नी, रिंकी,उमा, शिवम्,सत्यम, ध्रुव जी प्रहलाद जी,शारदा, सोना, पुनीता आदि श्रोता उपस्थित रहे।
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