News Addaa WhatsApp Group Join करें

श्रावण मास का शुभारंभ 4 जुलाई दिन मंगलवार से, कैसे करें रूद्राभिषेक….श्रावण मास 59 दिन का, पड़ रहे 8 सोमवार

Sanjay Pandey

Reported By:

Jul 2, 2023  |  4:50 PM

90 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
श्रावण मास का शुभारंभ 4 जुलाई दिन मंगलवार से, कैसे करें रूद्राभिषेक….श्रावण मास 59 दिन का, पड़ रहे 8 सोमवार

खड्डा/कुशीनगर। वर्ष 2023 का श्रावण माह में अधिक मास (मलमास) होने के कारण श्रावण मास पूरा 59 दिनों का है, जिसमें 8 सोमवार व्रत करने को मिल रहे हैं जो शास्त्रों में अत्यन्त ही शुभ माना गया है।

आपके लिए और..- शोर पर चला कानून का डंडा : एसपी केशव कुमार...

महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ट्रस्ट के ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पाण्डेय बताते हैं कि श्रावण माह भगवान शिव का पवित्र माह है। इस माह में शिव आराधना, शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रावण माष में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। इस बार श्रावण में 8 सोमवार पड़ रहा है। शिव पूजन में भगवान शिव को सर्वप्रथम जल धारा से स्नान कराकर पंचामृत स्नान व बृहदजलधारा स्नान कराकर भष्मादि लगाने के बाद भांग, विल्वपत्र, सफेद कनेर का पुष्प, सफेद मदार का पुष्प, धतूरा, शमीपत्र, तुलसी मंजरी विशेष रूप से चढ़ाकर पूजन करना चाहिए।

पूजन के पश्चात् ॐ नमःशिवाय मन्त्र या महामृत्युंजय मन्त्र का जप यथा सम्भव करना चाहिए। रुद्राभिषेक करने से कार्य की सिद्धि शीघ्र होती है। धन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को स्फटिक शिवलिगं पर गोदुग्ध या गन्ने के रस से सुख समृद्धि की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को गोदुग्ध में चीनी व मेवे के घोल से, शत्रु विनाश के लिए सरसों के तेल से, पुत्र प्राप्ति हेतु मक्खन या घी से, अभीष्ट की प्राप्ति हेतु गोघृत से तथा भूमि भवन एवं वाहन की प्राप्ति हेतु शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए।

हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नव ग्रहों के पीड़ा के निवारणार्थ निम्न द्रव्य विहित है। ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पाण्डेय बताते है यदि जन्म कुण्डली में सूर्य से सम्बन्धित कष्ट या रोग हो तो श्वेतार्क के पत्तों को पीस कर गंगाजल में मिलाकर रुद्राभिषेक करें। चन्द्रमा से सम्बन्धित कष्ट या रोग हो तो काले तिल को पीस कर गंगाजल में मिलाकर, मंगल से सम्बन्धित कष्ट या रोग हो तो अमृता के रस को गंगाजल में मिलाकर, बुध जनित रोग या कष्ट हो तो विधारा के रस से, गुरु जन्य कष्ट या रोग हो तो हल्दी मिश्रित गोदुग्ध से, शुक्र से सम्बन्धित रोग एवं कष्ट हो तो गोदुग्ध के छाछ से, शनि से सम्बन्धित रोग या कष्ट होने पर शमी के पत्ते को पीस कर गंगाजल में मिलाकर, राहु जनित कष्ट व पीड़ा होने पर दूर्वा मिश्रित गंगा जल से, केतु जनित कष्ट या रोग होने पर कुश की जड़ को पीसकर गंगाजल में मिश्रित करके रुद्राभिषेक करने पर कष्टों का निवारण होता है व समस्त ग्रह जनित रोग का क्षरण होता है।

ताज़ा मौसम अपडेट
संबंधित खबरें
शोर पर चला कानून का डंडा : एसपी केशव कुमार की सख्ती ,62 डीजे संचालकों पर मुकदमा
शोर पर चला कानून का डंडा : एसपी केशव कुमार की सख्ती ,62 डीजे संचालकों पर मुकदमा

कुशीनगर । ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कुशीनगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मोहर्रम…

सांसद ने सड़क का किया लोकार्पण
सांसद ने सड़क का किया लोकार्पण

बोदरवार, कुशीनगर :- क्षेत्र अंतर्गत स्थित सिधावल – परतावल मुख्य मार्ग से निकल कर…

खड्डा पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के मामले में 02 बाल अपचारियों को लिया अभिरक्षा
खड्डा पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के मामले में 02 बाल अपचारियों को लिया अभिरक्षा

खड्डा, कुशीनगर। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के दिशा निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के…

कार-बाइक की टक्कर में तीन की मौत
कार-बाइक की टक्कर में तीन की मौत

अहिरौली बाजार/कुशीनगर। स्थानीय थाना क्षेत्र के हाटा पिपराइच मार्ग पर तेज रफ्तार कार की…

Advertisement
News Addaa Logo

© All Rights Reserved by News Addaa 2020

News Addaa Breaking