हाटा/कुशीनगर। ईश्वर की महिमा अनंत है।वे अनादि हैं, सर्वकालिक हैं और सर्वत्र विराजमान हैं। उन्हें अपने हृदय में बसाने से ही उनकी कृपा मिलती है।
उक्त बातें स्थानीय श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय में चल रहे श्रीराम कथा के अंतिम पांचवें दिन की कथा में कहीं। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और भाईयों के जन्म के बाद नामकरण का कार्य गुरु वशिष्ठ ने किया। लक्षण के आधार पर चारों भाइयों का नामकरण किया । उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र विराजमान हैं।कण कण में व्याप्त हैं। लेकिन जबतक हम उन्हें भावपूर्वक हृदय में नहीं बसाते हैं तबतक उनकी कृपा नहीं होती है। यही माध्यम है परमात्मा से सानिध्य का। शिक्षा ग्रहण करने से लेकर भगवान की विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने वनवास, सीता हरण और तमाम लोगों के उद्धार की कथा से लेकर लंका विजय के बाद विभीषण को लंका की राजगद्दी पर बिठाने और पुनः माता जानकी और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या पहुंचने पर भव्य स्वागत की कथा रोचक रही। भगवान श्री राम के राज्याभिषेक के साथ श्रीराम कथा का समापन हुआ।
इस दौरान प्रबंधक अग्निवेश मणि मंत्री महामहोपाध्याय गंगेश्वर पाण्डेय अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण पाण्डेय, सेवा निवृत्त प्राचार्य डॉ सुधाकर तिवारी, रमेश भारद्वाज, भोला गुप्ता, दिलीप जायसवाल, संजय पाण्डेय, मोहन पाण्डेय,, विश्वास मणि, उपेंद्र तिवारी, पिंटू उपाध्याय, राजू बर्नवाल, मनोज गिरी, मिथिलेश चौरसिया, विनोद मणि, आदि उपस्थित रहे।इस दौरान भण्डारे का भी आयोजन किया गया। श्री राम के जयकारों से गूंज उठा विद्यालय परिसर।
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