देवी भागवत के आठवें स्कंध में देवी उपासना का विस्तार से वर्णन है। देवी का पूजन-अर्चन-उपासना-साधना इत्यादि के पश्चयात दान देने पर लोक और परलोक दोनों सुख देने वाले होते हैं।साथ मे आप को यह भी जानना चाहिए कि नवदुर्गा के नौ स्वरूप नवग्रह के भी घोतक है,आप के कुंडली में जो भी ग्रह खराब हो नवरात्रि में उन ग्रहो के दिन उनकी भी गायत्री मन्त्रो द्वारा जप करके अनुकूल बना सकते है।
प्रतिपदा तिथि के दिन देवी का षोडशेपचार से पूजन करके नैवेद्य के रूप में देवी को गाय का घृत (घी) अर्पण करना चाहिए। मां को चरणों चढ़ाये गये घृत को ब्राम्हणों में बांटने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
प्रथम दिवस भगवान सूर्य को समर्पित है।आज प्रथम दिवस के पूजन के बाद भगवान सूर्य का सूर्यगायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का जन्म सिंह लग्न या सिंह राशि मे हुआ हो और जिनका सूर्य कमजोर हो वो नवरात्रि में प्रत्येक दिन उपरोक्त मन्त्र का जप अवश्य करे।
सूर्य गायत्री मंत्र – ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात।
द्वितीय दिवस भगवान चंद्रमा को समर्पित है ।आज द्वितीय दिवस के पूजन के बाद भगवान चंद्रमा का चंद्रगायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का जन्म कर्क लग्न या कर्क राशि मे हुआ हो और जिनका चंद्रमा कमजोर हो वो नवरात्रि के द्वितीय दिन से उपरोक्त मन्त्र का जप शुरू करके रोज करे।
चंद्र गायत्री मंत्र – ॐ अमृतांगाय विद्महे कला रूपाय धीमहि तन्नो सोमः प्रचोदयात्।
द्वितीया तिथि के दिन देवी को चीनी का भोग लगाकर दान करना चाहिए। चीनी का भोग लागाने से व्यक्ति दीर्घजीवी होता हैं।
तृतीया तिथि के दिन देवी को दूध या दूध से बने समाग्री का भोग लगाकर दान करना चाहिए। इसका भोग लागाने से व्यक्ति को दुखों से मुक्ति मिलती हैं।
तृतीय दिवस मंगल ग्रह को समर्पित है। आज तृतीय दिवस के पूजन के बाद मंगल ग्रह का मंगल गायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का जन्म मेष लग्न या वृश्चिक राशि मे हुआ हो और जिनका मंगल ग्रह कमजोर हो वो नवरात्रि के तृतीय दिन से उपरोक्त मन्त्र का जप शुरू करके रोज करे।
मंगल गायत्री मंत्र- ॐ अंगारकाय विद्महे शक्ति हस्ताय धीमहि, तन्नो भौमः प्रचोदयात्।
आज आप देवी पूजन के बाद एक नारियल लेकर हनुमान मंदिर जाए और वहां हनुमान चालीसा का पाठ करे तत्पश्चात नारियल फोड़ कर प्रसाद के रूप में बांट दे।
चतुर्थी तिथि के दिन देवी को मालपुआ भोग लगाकर दान करना चाहिए। मालपुए का भोग लागाने से व्यक्ति के विपत्ति का नाश होता हैं।
चतुर्थ दिवस बुध देव को समर्पित है।आज चतुर्थ दिवस के पूजन के बाद बुध देव का बुधगायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का जन्म मिथुन लग्न या मिथुन राशि मे हुआ हो और जिनका बुध कमजोर हो वो नवरात्रि के चतुर्थ दिन से उपरोक्त मन्त्र का जप शुरू करके रोज करे।
बुध गायत्री मंत्र –“ॐ चन्द्रपुत्राय विदमहे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नोबुध: प्रचोदयात ।”
पंचमी तिथि के दिन देवी को केले का भोग लगाकर दान करना चाहिए। केले का भोग लागाने से व्यक्ति के बुद्धि, विवेक का विकास होता हैं। व्यक्ति के परिवारीकसुख समृद्धि में वृद्धि होती हैं।
पंचम दिवस बृहस्पति देव को समर्पित है।आज पंचम दिवस के पूजन के बाद बृहस्पति देव का गायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का जन्म धनु लग्न या मीन राशि मे हुआ हो और जिनका बृहस्पति कमजोर हो वो नवरात्रि के पंचम दिन से उपरोक्त मन्त्र का जप शुरू करके रोज करे।
गुरु गायत्री मंत्र- ॐ अंगिरो जाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि तन्नो गुरु प्रचोदयात्।।
षष्ठी तिथि के दिन देवी को मधु (शहद, महु, मध) का भोग लगाकर दान करना चाहिए। मधु का भोग लागाने से व्यक्ति को सुंदर स्वरूप कि प्राप्ति होती हैं।
छठा दिवस शुक्रदेव को समर्पित है।आज छठादिवस के पूजन के बाद शुक्रदेव का शुक्रगायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का जन्म वृष/तला लग्न या वृष/तुलाराशि मे हुआ हो और जिनका शुक्र कमजोर हो वो नवरात्रि के छठेदिन से उपरोक्त मन्त्र का जप शुरू करके रोज करे।
शुक्र गायत्री मंत्र – ॐ भृगुराजाय विद्महे दिव्य देहाय धीमहि तन्नो शुक्र प्रचोदयात्।।
सप्तमी तिथि के दिन देवी को गुड़ का भोग लगाकर दान करना चाहिए। गुड़ का भोग लागाने से व्यक्ति के समस्त शोक दूर होते हैं।
सप्तम दिवस शनिदेव को समर्पित है।आज सप्तम दिवस के पूजन के बाद शनिदेव का शनिगायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का जन्म मकर/कुम्भ लग्न या मकर/कुम्भ राशि मे हुआ हो और जिनका शनि कमजोर हो वो नवरात्रि के सप्तम दिवस से उपरोक्त मन्त्र का जप शुरू करके रोज करे।
शनि गायत्री मन्त्र- ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नो शनि:प्रचोदयात।
अष्टमी तिथि के दिन देवी को श्रीफल (नारियल) का भोग लगाकर दान करना चाहिए। श्रीफल का भोग लागाने से व्यक्ति के संताप दूर होते हैं।
अष्टम दिवस राहू देव को समर्पित है।अष्टम दिवस के पूजन के बाद राहूदेव का राहूगायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का राहू ग्रह कमजोर हो वो नवरात्रि के अष्टम दिवस से उपरोक्त मन्त्र का जप शुरू करके रोज करे।
राहु गायत्री मंत्र:-“ॐ शिरो रूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात्” ।।
आज के दिन देवी पूजन के बाद शहद शिवलिंग पर चढ़ाये और थोड़ा सा शहद मिट्टी के पात्र में रख कर घर मे पूजा स्थल के ऊपरी हिस्से में या ऊपर कोई अलमारी हो तो उसके टॉप पर रख दे और साल भर रखा रहने दे।फिर देखिए चमत्कारिक रूप से घर का माहौल आपके पक्ष में होता है।
नवमी तिथि के दिन देवी को धान के लावे का भोग लगाकर दान करना चाहिए। धान के लावे का भोग लागाने से व्यक्ति के लोक और परलोक का सुख प्राप्त होता हैं।
नवम दिवस केतु देव को समर्पित है।आज नवम दिवस के पूजन के बाद केतुदेव का केतुगायत्री मंत्र का जप भी जरूर करें।जिन जातक का केतु ग्रह कमजोर हो वो नवरात्रि के नवम दिवस से उपरोक्त मन्त्र का जप शुरू करके रोज करे।
केतु गायत्री- ॐ पद्म पुत्राय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो केतु प्रचोदयात्।।
नवम दिवस को देवी पूजन के बाद एक कम्बल जो दो रंग का हो किसी जरूरत मंद को दान कर दें
एक छोटी सी सलाह आपके जीवन को सुखमय बना सकती हैं ,हम आपके भाग्य को नहीं बदल सकते लेकिन आप की दिशा एवं दशा को बदलने में सहायक साबित हो सकते हैं.
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