कुशीनगर। थाना सेवरही का नज़ारा जन्माष्टमी पर बिल्कुल वैसा ही था…जैसे वासुदेव अपने पुत्र कृष्ण को सिर पर टोकरी में रखकर यमुना नदी पार कर रहे हों। 31 साल बाद जब ज़िले के सभी थानों में जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया गया, तो हर तस्वीर अद्भुत रही। लेकिन सेवरही थाने का दृश्य सबसे खास रहा।
थानाध्यक्ष धीरेन्द्र राय ने वासुदेव का रूप धारण कर सिर पर टोकरी में बाल गोपाल को उठाया और थाने परिसर तक पहुंचे। जहाँ नदी तो नहीं थी…लेकिन 31 वर्षों से चली आ रही उस मौन परंपरा की धारा को ज़रूर पार किया गया, जिसे तोड़ने की हिम्मत आज तक किसी ने नहीं की थी।
गौरतलब है कि 30 अगस्त 1994 को जन्माष्टमी के दिन जंगल के डकैतों से मुठभेड़ में कुशीनगर के 6 जांबाज़ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। उस दर्दनाक घटना के बाद पुलिस विभाग ने इस पर्व को मानो मौन श्रद्धांजलि देते हुए मनाना बंद कर दिया था। लेकिन इस बार पुलिस अधीक्षक कुशीनगर संतोष मिश्रा के नेतृत्व और पहल पर 31 साल बाद यह परंपरा पुनः शुरू हुई।
सेवरही थाने पर थानाध्यक्ष धीरेन्द्र राय की झांकी ने सभी को भावविभोर कर दिया। बाल गोपाल की भक्ति और शहीदों की याद से जुड़ा यह अद्भुत संगम पुलिसकर्मियों के लिए गर्व और श्रद्धा का क्षण बन गया।
कुशीनगर पुलिस की यह तस्वीर न सिर्फ आस्था और परंपरा की मिसाल है, बल्कि शौर्य और बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि भी है।
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