कुशीनगर। खाकी वर्दीधारियों की जिम्मेदारी, थाने की कार्यप्रणाली और फरियादियों की समस्याओं को सुनने का अनुभव शुक्रवार को द क्रिसेन्ट स्कूल की कक्षा 12वीं की छात्रा अंशिका सिंह को मिला। मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत अंशिका को एक दिन के लिए कप्तानगंज थाने का थानाध्यक्ष बनाया गया। थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने थाने पर आए फरियादियों की शिकायतें सुनीं और पुलिस की कार्यशैली को नजदीक से समझा। इस अनूठी पहल का उद्देश्य छात्राओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ उनमें आत्मविश्वास जगाना और उन्हें अपने अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से संचालित मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत 16 अक्टूबर को द क्रिसेन्ट स्कूल की छात्राओं को कप्तानगंज थाने पर आमंत्रित किया गया। यहां थानाध्यक्ष कप्तानगंज और मिशन शक्ति टीम ने छात्राओं को थाना परिसर एवं विभिन्न कार्यालयों का भ्रमण कराया। उन्हें पुलिस की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियों और आमजन की समस्याओं के समाधान में पुलिस की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
इस दौरान छात्राओं को महिला हेल्प डेस्क, साइबर हेल्प डेस्क, महिला शक्ति केंद्र, आईजीआरएस कार्यालय, कंप्यूटर कक्ष, जनसुनवाई व्यवस्था और हवालात के बारे में बताया गया। पुलिसकर्मियों ने समझाया कि पीड़ितों की शिकायतों को सुनना, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण द क्रिसेन्ट स्कूल की कक्षा 12वीं की छात्रा अंशिका सिंह को एक दिन के लिए थानाध्यक्ष बनाया जाना रहा। अंशिका सिंह, सुनील कुमार सिंह की पुत्री हैं और कप्तानगंज थाना क्षेत्र के बौलिया गांव की निवासी हैं। थानाध्यक्ष की भूमिका में उन्होंने थाने पर आए फरियादियों की शिकायतें सुनीं। इस अनुभव के माध्यम से उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि पुलिस किस प्रकार लोगों की समस्याओं को सुनती है और उनके समाधान के लिए आगे की कार्रवाई करती है।
थानाध्यक्ष कप्तानगंज और मिशन शक्ति टीम ने छात्राओं को अपने अधिकारों, कर्तव्यों और सम्मान के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। उन्हें बताया गया कि किसी भी प्रकार की परेशानी, उत्पीड़न या असुरक्षा की स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से शिकायत करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता लेनी चाहिए।
पुलिस की इस पहल से छात्राओं को न केवल थाने की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिला, बल्कि नेतृत्व करने, निर्णय लेने और जनसमस्याओं को समझने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ।
मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत कुशीनगर पुलिस महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। छात्रा को एक दिन का थानाध्यक्ष बनाने की पहल इसी अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के मन से झिझक दूर करना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें यह एहसास कराना है कि वे भी नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं।
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