तरयासुजान/कुशीनगर । “कानून के नाम पर जो सिर्फ़ डायलॉग बोलते हैं, वे फिल्मों में ही अच्छे लगते हैं। हकीकत में वो हीरो है जो गोलियों की आवाज़ में भी इंसाफ़ सुनता है। तरयासुजान का वो हीरो है – इंस्पेक्टर धनबीर सिंह।” सिर्फ़ साढ़े तीन महीने में उन्होंने साबित कर दिया कि पुलिसिंग केवल वर्दी पहनना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाना है। चार बार तस्करों से मुठभेड़, गैंगस्टर और गुंडा एक्ट की धाराओं में बड़ी कार्रवाई, और नदी में नाव पर लदी शराब जब्त करना – ये सब बताता है कि उन्होंने कानून को किताबों से निकाल कर ज़मीन पर उतार दिया।
कुशीनगर जिले के तरयासुजान थाना क्षेत्र में तैनाती के बाद से ही इंस्पेक्टर धनबीर सिंह ने अपराधियों के खिलाफ लगातार मोर्चा खोला। उनके कार्यकाल का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि कोई भी अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून से बच नहीं सकता। तैनाती के शुरुआती दिनों से ही उन्होंने पशु तस्करी, शराब तस्करी और गुंडागर्दी जैसे अपराधों पर कड़ा एक्शन लिया।
तरयासुजान में इंस्पेक्टर धनबीर सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही पशु तस्करों के खिलाफ की गई चार बड़ी मुठभेड़ें। इनमें से दो मुठभेड़ तरयासुजान थाना क्षेत्र में और दो अन्य थाना क्षेत्रों में हुईं। इन अभियानों में कई कुख्यात तस्कर गिरफ्तार किए गए। पुलिस की इन कार्रवाइयों से अपराधियों में खौफ का माहौल है।
इंस्पेक्टर धनबीर सिंह ने यह भी दिखाया कि कानून का डंडा सिर्फ़ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि चलाने के लिए होता है। एक बड़े गो-तस्कर पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके अलावा छः लोगों पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई हुई, जिनमें चार पशु तस्कर, एक चोरी का आरोपी और एक मारपीट का आरोपी शामिल है।
नदी के रास्ते से हो रही शराब तस्करी को रोकने के लिए इंस्पेक्टर धनबीर सिंह ने एक खास ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में पुलिस टीम ने नदी में नाव पर लदी भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की और नाव को जब्त कर लिया। इस कार्रवाई ने तस्करों के नेटवर्क को तोड़ दिया।
धनबीर सिंह का फोकस सिर्फ़ तस्करी रोकने तक सीमित नहीं रहा, उन्होंने इलाके के अवैध कारोबारियों पर भी शिकंजा कसा। कई बार रात में दबिश, लगातार निगरानी और टीम को एक्टिव रखने की रणनीति के चलते अपराधियों में खौफ और जनता में सुरक्षा का एहसास बढ़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इंस्पेक्टर धनबीर सिंह की तैनाती के बाद थाने की छवि बदली है। अब पुलिस को लोग सिर्फ शिकायत दर्ज कराने वाली ताकत नहीं, बल्कि सुरक्षा की गारंटी मानते हैं।
“पहले तस्कर खुलेआम घूमते थे, अब पुलिस की सख़्ती से हालात बदले हैं। अपराधी इलाके से भाग रहे हैं।” – एक स्थानीय नागरिक ने कहा।
सिर्फ़ साढ़े तीन महीने में यह बदलाव दिखाता है कि अगर पुलिसिंग सही इरादे और हिम्मत के साथ हो, तो अपराध कितना भी बड़ा क्यों न हो, खत्म किया जा सकता है। इंस्पेक्टर धनबीर सिंह का यह कार्यकाल न सिर्फ तरयासुजान के लिए, बल्कि पूरे जिले के लिए एक मिसाल है।
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