- चातुर्मास 4 की बजाय 5 महीने का होगा
हाटा/कुशीनगर। श्री संवत्सर 2080 ईस्वी सन् 2023 इस साल सावन में अधिकमास लगने के कारण सावन 59 दिनों का यानी दो महीने का होगा।हर तीन साल में एक बार साल का एक माह अतिरिक्त होता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. अधिकमास समय की स्थिति को अनुकूल बनाने के लिए लगता है।अग्रेंजी कैलेंडर में तो हर साल 12 महीने होते हैं. लेकिन पंचांग के अनुसार हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह होता है, जिसे अधिकमास या फिर पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. अधिकमास में पूजा-पाठ, व्रत और साधना का महत्व काफी बढ़ जाता है।वर्ष 2023 बहुत ही खास रहने वाला है क्योंकि हिंदू पंचाग के अनुसार इस बार सावन दो महिने का होगा जो 19 वर्ष बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब साल में अधिकमास होगा।इस अधिकमास के कारण सावन एक नहीं बल्कि 2 महीने का होगा अधिकमास होने के कारण सभी व्रत-त्योहार देर से आएंगे और चातुर्मास 4 की बजाय 5 महीने का होगा।
उक्त बातें ज्योतिष पं विवेकानंद शास्त्री ने बताया।श्री शास्त्री ने बताया कि ज्योतिषियों के अनुसार इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिकमास रहेगा जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं।इस मास में पूजा-अर्चना करने से हरि भगवान के साथ ही भोलेनाथ की भी कृपा मिलती है।पंचाग के मुताबिक इस वर्ष 2023 में अधिक मास 18 जुलाई 2023 से शुरू होगा और इसका 16 अगस्त 2023 को होगा।कृष्ण पक्ष का सावन 4 जुलाई से 17 जुलाई तक रहेगा।इसके बाद 18 जुलाई से दूसरा सावन यानी अधिक मास शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा और यह एक अगस्त तक रहेगा।दो अगस्त से 16 अगस्त तक अधिक मास कृष्ण पक्ष रहेगा।वहीं 17अगस्त से 3 अगस्त तक शुद्ध सावन रहेगा।इस वर्ष सावन मे आठ सोमवार होंगे पहला सोमवार 10 जुलाई,दुसरा 17 जुलाई, तीसरा 24 जुलाई,चौथा 31 जुलाई, पांचवां 7 अगस्त, छठवां 14 अगस्त, सातवां 21 अगस्त, और आठवां 28 अगस्त को होंगे।17 जुलाई को सोमवती अमावस्या पड़ेगी।हर तीसरे वर्ष लगभग 32 महीनों और 16 दिन बाद मलमास आता है. और इस महीने के स्वामी नारायण हैं। इस बार दो महिने काा सावन होने से भक्तों के पास ज्यादा समय भगवान शिव को प्रसन्न करने का होता है क्योंकि सावन और सोमवार दोनों ही भगवान शिव को प्रिय हैं इसलिए इस बार सावन में भोलेबाबा और मां पार्वती की सच्चे मन से आराधना करें जिससे सभी की मनोकामना पूरी होगी। साथ ही अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा का भी महत्व होता है।
इस सावन भक्तों के पास हरि और शिव दोनों को खुश करने का मौका है इसलिए नियम से सभी पूजा-पाठ करें। हरि के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करें और इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। इस महीने में दान-पुण्य, पूजा-पाठ, व्रत-उपवास, विष्णु मंत्रों का जाप आदि करना चाहिए।
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