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UP: CM योगी ने वीकेंड लॉकडाउन के साथ और क्या-क्या दिए हैं अहम निर्देश, पढ़ें पूरी डिटेल!

न्यूज अड्डा डेस्क

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Apr 20, 2021  |  4:00 PM

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UP: CM योगी ने वीकेंड लॉकडाउन के साथ और क्या-क्या दिए हैं अहम निर्देश, पढ़ें पूरी डिटेल!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने मंगलवार को यूपी में वीकेंड लॉकडाउन (Weekend Lockdown) का ऐलान कर दिया है. इसके अलावा प्रदेश के 500 से ज्यादा एक्टिव केस वाले जिलों में रोज नाइट कर्फ्यू का फरमान सुनाया है. कोविड-19 प्रबंधन के लिए गठित टीम-11 को सीएम योगी ने कई अहम दिशा-निर्देश दिए हैं. इनमें ऑक्सीजन की व्यवस्था लेकर प्रदेश में रणनीति के साथ कोरोना गाइललाइंस के पालन की बातें हैं.

आज की हॉट खबर- “एसपी केशव कुमार के सख्त निर्देश पर हरकत में आई...

सीएम योगी के निर्देश…

कोविड-19 की विभीषिका के बीच संयम और धैर्य हमारा सबसे बड़ा हथियार है. प्रत्येक शनिवार और रविवार को प्रदेश में साप्ताहिक बंदी (कोरोना कर्फ्यू) प्रभावी रहेगा. जिन जिलों में 500 से अधिक एक्टिव केस हैं, वहां हर दिन रात्रि 8 बजे से अगले दिन प्रातः 7 बजे तक आवश्यक सेवाओं को छोड़कर शेष गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी. इस नियम को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए.

लोग जहां तक जरूरी हो, घर से बाहर न निकलें. पर्व और त्योहार घर पर ही मनाएं. निकलें तो मास्क जरूर लगाएं. सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ न हो. इसे कड़ाई से लागू किया जाए.

प्रवासी कामगारों की टेस्टिंग और ट्रीटमेंट की व्यवस्था करें

महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली से प्रवासी जनों की वापसी हो रही है. सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरते जाते की आवश्यकता है. इन प्रवासी कामगार/श्रमिक जनों के सुगमतापूर्ण आवागमन की व्यवस्था की जाए. गृह विभाग और परिवहन विभाग समन्वय बनाकर आवश्यक कार्यवाही करें. इन प्रवासी श्रमिक जनों की टेस्टिंग और आवश्यकतानुसार ट्रीटमेंट की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए.

कोविड संक्रमण से सुरक्षित रखने में टीकाकरण सर्वाधिक कारगर है. उत्तर प्रदेश में अब तक कोविड टीकाकरण अभियान बेहतर ढंग से संचालित हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मई से 18 वर्ष की आयु से अधिक के सभी लोगों के टीकाकरण की व्यवस्था लागू की है. टीकाकरण का यह नया चरण कोविड से लड़ाई में निर्णायक सिद्ध होगा. एक मई से शुरू हो रहे वृहद टीकाकरण के लिए सभी जरूरी प्रबन्ध सुनिश्चित किए जाएं.

सीएम योगी का ट्वीट

ऑक्सीजन को लेकर अफवाहों के फेर में न आएं लाेग

कोविड संक्रमण को कम करने के लिए राज्य सरकार बदलती परिस्थितियों के बीच लगातर कदम उठा रही है. सभी जिलों में कोविड डेडिकेटेड अस्पतालों को बढ़ाया जा रहा है. आईसीयू और आइसोलेशन बेड में हर दिन इजाफा हो रहा है. प्रदेश में ऑक्सीजन सहित सभी मेडिकल आवश्यकताओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. अफवाहों के फेर में न आएं.

लखनऊ, कानपुर नगर, प्रयागराज, वाराणसी, झांसी, गोरखपुर, मेरठ जनपदों सहित प्रदेश के सभी जिलों में कोविड बेड की संख्या को दोगुना करने की आवश्यकता है. फौरी तौर पर सभी जिलों में 200-200 बेड का विस्तार किया जाए. यह बेड ऑक्सीजन की सुविधा से लैस हों. इस प्रकार से 75 जिलों में तत्काल करीब 15,000 बेड का इजाफा हो सकेगा. सचिव स्तर के एक अधिकारी की तैनाती प्रदेश में बेड विस्तार के कार्य के लिए लगाई जाए. चिकित्सा शिक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री इस संबंध में सभी जिला प्रशासनों से संवाद स्थापित कर कार्यवाही सुनिश्चित कराएं.

लखनऊ के अस्पतलों को लेकर अहम निर्देश

लखनऊ के केजीएमयू तथा बलरामपुर चिकित्सालय को पूरी क्षमता के साथ डेडिकेटेड कोविड अस्पताल के तौर पर पूरी क्षमता के साथ संचालित करें. इसी प्रकार, एरा, टीएस मिश्रा, इंटीग्रल, हिन्द तथा मेयो मेडिकल कॉलेज को पूरी क्षमता के साथ डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल के रूप में क्रियाशील रखा जाए. यहां इलाजरत नॉन कोविड मरीजों को यथासंभव शिफ्ट किया जाए. वर्तमान में 4500 से अधिक बेड लखनऊ में उपलब्ध हैं और नए हॉस्पिटल को एल-2 और एल-3 श्रेणी में जोड़कर बेड्स बढ़ाये जाएं. लखनऊ में सभी हॉस्पिटलों के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त की जाए. इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के माध्यम से यहां की स्थितियों पर लगातार नजर रखी जाए.

प्रयागराज, वाराणी, कानपुर में भी रहें तैयार

प्रयागराज के स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज और यूनाइटेड मेडिकल कॉलेज में 800 से अधिक बेड उपलब्ध हैं. इसे और बढ़ाया जाना चाहिए. निजी अस्पतालों के बेड इसके अतिरिक्त हैं. वाराणसी में आरटीपीसीआर का पॉजिटिविटी रेट अधिक है, यहां और अधिक टेस्ट किए जाने की जरूरत है. कोविड संक्रमण की रफ्तार जिस प्रकार बढ़ रही है, उस दशा में यहां और अधिक आइसोलेशन और आईसीयू बेड्स की आवश्यकता पड़नी तय है. कानपुर में जीएसवीएम, रामा, नारायणा मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ निजी अस्पतालों के संसाधनों का भी कोविड के लिए उपयोग में लाया जाए.

यह सुखद है कि जिन मरीजों को कोविड टीकाकरण के दो डोज लग चुके हैं, यदि कतिपय कारणों से पुनः संक्रमित हुए हैं, तो भी चार से पांच दिनों में स्वस्थ हो जा रहे हैं. अस्पतालों की डिस्चार्ज पॉलिसी इसी के अनुरूप तैयार की जानी चाहिए.

एल-1, एल-2 और एल-3 हॉस्पिटल की अलग-अलग मॉनिटरिंग करते ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जाए. ऑक्सीजन की सुचारू आपूर्ति के लिए यह जरूरी है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति संस्थागत रूप से हो. प्रत्येक अस्पताल में न्यूनतम 36 घंटों का ऑक्सीजन बैकअप जरूर रहे.

ऑक्सीजन रीफिलिंग में निवेश का स्वागत

वर्तमान समय की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए यह सुनिश्चित करें कि प्रदेश स्थित एमएसएमई सहित सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों में उत्पादित होने वाली ऑक्सीजन का इस्तेमाल केवल मेडिकल कार्य के लिए हो. इन ऑक्सीजन प्लांट को इनके निकटतम हॉस्पिटल से जोड़ा जाए. इस संबंध में व्यापक कार्ययोजना आज ही तैयार कर ली जाए. जो निजी इकाइयां ऑक्सीजन रीफिलिंग के क्षेत्र में निवेश करना चाहती हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए. ऑक्सीजन उत्पादनकर्ताओं के लाइसेंस के स्वतः नवीनीकरण करने के संबंध में तत्काल आदेश कर दिया जाए.

सभी ऑक्सीजन प्लांट पर पुलिस सुरक्षा हो. ऑक्सीजन वाले वाहनों की जीपीएस मॉनिटरिंग की जाए. ऑक्सीजन व अन्य जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी रोकने के लिए हर संभव कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए.

यूपी में 100 बेड से ज्यादा के अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट अनिवार्य

देश में पांच नए ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की कार्यवाही प्रारंभ हो गई है. भविष्य के दृष्टिगत 100 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापना को अनिवार्य किया जाए. एयर सेपरेशन यूनिट जैसी आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहित किया जाए। प्रदेश में इसकी क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए.

उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी तथा भविष्य की सम्भावित स्थिति का आकलन करते हुए भारत सरकार को समय से ऑक्सीजन आपूर्ति की मांग भेजी जाए। प्रयास करें कि हमें मोदीनगर, पानीपत, रुड़की आदि उत्तर प्रदेश के निकटवर्ती शहरों से ही आपूर्ति हो. चिकित्सा शिक्षा मंत्री ऑक्सीजन के डिमांड और सप्लाई के संतुलन को सुनिश्चित करें. किसी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता हो, यो तत्काल सूचित करें.

होम आइसोलेशन में रह रहे व्यक्तियों के साथ नियमित संवाद जरूरी है. होम आइसोलेशन में रह रहे व्यक्तियों को दिए जाने वाले मेडिकल किट में 07 दिन की दवा होनी चाहिए. वर्तमान में दवाओं की कोई कमी नहीं है. इसकी हर दिन समीक्षा की जाए.

दो दिन में रेमेडेसीविर के 20000 वॉयल अहमदाबाद से होंगे प्राप्त

रेमिडेसीवीर सहित किसी भी प्रकार के जीवनरक्षक दवाओं की कोई कमी नहीं है. सभी जिलों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित रखी जा रही है. जुबिलियंट फार्मा, कैडिला, माइलान और सिप्ला जैसी निर्माता कंपनियों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाए. जुबिलियंट फार्मा की ओर से आज रेमेडेसीवीर की आपूर्ति कर दी जाएगी जबकि कैडिला से परसों तक अहमदाबाद से 20,000 वॉयल और प्राप्त हो जाएंगे. शेष कम्पनियों से सतत संवाद बनाकर प्रदेश में रेमेडेसीवीर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

जनपदों से सम्पर्क बनाकर ऑक्सीजन, रेमडेसिविर एवं अन्य जीवनरक्षक औषधियों का सुचारु एवं पारदर्शितापूर्ण वितरण कराया जाए. ऑक्सीजन तथा जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी में संलिप्त तत्वों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई करें.

एम्बुलेंस के रिस्पांस टाइम को कम करने पर विशेष ध्यान दें. स्वच्छता, सैनिटाइजेशन तथा फॉगिंग अभियान के दौरान जनपदों में की जा रही गतिविधियों की फोटोग्राफ्स सहित रिपोर्ट प्राप्त की जाए.

कोविड में ड्यूटी करते हुए दिवंगत हुए कोरोना वॉरियर्स की बीमा राशि का लंबित भुगतान तत्काल कराया जाए. यह संवेदना राशि उनके परिवारों के लिए बड़ा संबल होगी.

टेस्टिंग क्षमता में और बढ़ोतरी आवश्यक

प्रदेश में 104 निजी प्रयोगशालाएं तथा 125 सार्वजनिक क्षेत्र की प्रयोगशालाएं कोविड टेस्ट कार्य में संलग्न हैं. अब तक कुल 03 करोड़ 84 लाख से अधिक कोविड टेस्ट हो चुके हैं. 18 अप्रैल, 2021 को निजी प्रयोगशालाओं द्वारा लगभग 19 हजार से अधिक आरटीपीसीआर टेस्ट किए गए हैं. टेस्टिंग क्षमता में और बढ़ोतरी आवश्यक है. इस संबंध में सभी जरूरी प्रयास किए जाएं.

मास्क की महत्ता के बारे में लोगों को जगरूक किया जाए. अपील से न मानने वाले लोगों के खिलाफ जुर्माना लगाने की कार्रवाई हो. कंटेनमेंट जोन और क्वारन्टीन सेंटर के प्राविधानों को सख्ती से लागू करें. निगरानी समितियों से संवाद बनाकर उनसे फीडबैक प्राप्त किया जाए.

अस्पतालों एवं ऑक्सीजन उत्पादन व रीफिलिंग से जुड़ी इकाइयों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

गेहूं खरीद के दौरान कोविड प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया जाए. गेहूं खरीद प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग की जाए. भुगतान में विलंब न हो.

पंचायत चुनावों में कार्यरत पुलिस बल व अन्य कार्मिकों की सुरक्षा के सभी जरूरी इंतज़ाम किए जाएं. पंचायत चुनाव में एक साथ 05 से अधिक लोग एकत्रित न हों.

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