उत्तर प्रदेश में प्रत्येक गोवंश की अपनी पहचान होगी. इसके लिए गए और अन्य गोवंश की ईयर टैगिंग की जा रही है. इसमें प्रत्येक पशु को 12 अंकों का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जा रहा है. यह एक तरीके से पशुओं का पहचान पत्र है. इसमें उनसे जुड़ी सभी जानकारियां होंगी. ईयर टैगिंग के लिए पशुपालकों से कोई फीस नहीं ली जा रही है.
प्रमुख सचिव पशुपालन भुवनेश कुमार ने बताया है कि टीका लगाते वक्त पशु की ईयर टैगिंग अनिवार्य की गई है, जिसके तहत पीले कार्ड को पशु के कान में लगाया जा रहा है. इसमें पशु की उम्र, लोकेशन, प्रजाति, ब्रिडिंग और टीकाकरण की स्थिति के साथ-साथ दूध की मात्रा कद काठी और पालक का नाम आधार व फोन नंबर जानकारी दर्ज की जा रही है.
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