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“अपने जवान को अंतिम सलाम… जब एसपी केशव कुमार ने दिया कंधा, पुलिस लाइन में छलक पड़े जज़्बात”

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Jul 11, 2026  |  6:04 PM

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कुशीनगर। कुछ दृश्य शब्दों से नहीं, भावनाओं से बयान होते हैं। शनिवार को कुशीनगर पुलिस लाइन में ऐसा ही एक हृदयविदारक और भावुक क्षण देखने को मिला, जिसने वर्दी के पीछे छिपे संवेदनशील इंसान का चेहरा सबके सामने ला दिया। वहां मौजूद हर आंख नम थी, हर चेहरा गमगीन था और माहौल में सिर्फ एक ही एहसास था—अपने साथी को हमेशा के लिए विदा करने का दर्द।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की व्यस्तताओं को पूरा करने के बाद पुलिस अधीक्षक केशव कुमार बिना किसी औपचारिकता के सीधे पुलिस लाइन पहुंचे, जहां दिवंगत आरक्षी दिनेश यादव को अंतिम विदाई दी जा रही थी। इस दौरान उन्होंने केवल श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की, बल्कि आगे बढ़कर अपने जवान की अर्थी को अपने कंधों पर उठाया। जैसे ही एसपी ने अपने साथी को कंधा दिया, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और परिजनों की आंखें भर आईं। वह दृश्य हर किसी के मन को भीतर तक झकझोर गया।
एक अधिकारी और अधीनस्थ के रिश्ते से कहीं ऊपर उठकर यह पल एक परिवार के अपने सदस्य को विदा करने जैसा था। शोक में डूबे परिजनों के बीच पहुंचकर एसपी केशव कुमार ने उन्हें सांत्वना दी, उनका हाथ थामा और विश्वास दिलाया कि इस कठिन समय में पूरा कुशीनगर पुलिस परिवार उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
वर्दी अक्सर सख्ती, अनुशासन और कर्तव्य की पहचान मानी जाती है, लेकिन उस दिन पुलिस लाइन में वर्दी का एक ऐसा चेहरा सामने आया, जिसमें अपनापन, करुणा और आत्मीयता साफ झलक रही थी। अपने साथी को अंतिम सफर में कंधा देना केवल एक परंपरा नहीं था, बल्कि उस रिश्ते का सम्मान था, जो एक ही वर्दी पहनने वाले साथियों के बीच विश्वास, समर्पण और भाईचारे से बनता है।
आरक्षी दिनेश यादव के असामयिक निधन से पूरा पुलिस महकमा शोकाकुल है। अंतिम विदाई के समय हर कदम भारी था और हर सलामी में अपने साथी को खोने का दर्द साफ महसूस किया जा सकता था। इस भावुक क्षण में पुलिस अधीक्षक केशव कुमार का अपने जवान के प्रति दिखाया गया सम्मान और संवेदनशीलता यह संदेश दे गई कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो अपने लोगों के साथ केवल ड्यूटी में नहीं, बल्कि उनके अंतिम सफर तक भी कंधे से कंधा मिलाकर चलता है।
शनिवार को कुशीनगर पुलिस लाइन में केवल एक आरक्षी की अंतिम यात्रा नहीं निकली, बल्कि इंसानियत, संवेदना और नेतृत्व का ऐसा दृश्य सामने आया, जिसे देखने वालों की आंखें नम हो गईं और जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

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