कुशीनगर। पुलिस के कब्जे में लिए गए एक ट्रक को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वाहन स्वामी का आरोप है कि पुलिस द्वारा ट्रक को कब्जे में लेने के बाद उसे पुलिस की निगरानी में खड़ा किया गया था। बाद में न्यायालय से रिलीज आदेश लेकर जब वह ट्रक लेने थाने पहुंचा तो पुलिसकर्मियों ने ट्रक की चाबी उपलब्ध करा दी। लेकिन चालक ने जैसे ही ट्रक स्टार्ट करने का प्रयास किया, वाहन चालू नहीं हुआ। जांच की गई तो पता चला कि ट्रक का सेल्फ ही गायब था। वहीं, वाहन के जीपीएस रिकॉर्ड में पुलिस के कब्जे में लिए जाने के बाद भी करीब छह मिनट तक मूवमेंट दर्ज होने का दावा किया गया है। पूरे मामले को लेकर वाहन स्वामी ने पुलिस अधीक्षक से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस अधीक्षक को 3 अक्टूबर 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र में वाहन स्वामी अखिलेश ठुकराई, निवासी ग्राम बसडिला बुजुर्ग, थाना तमकुहीराज ने बताया है कि उसके नाम पर वाहन संख्या यूपी-53 जीटी-7841 पंजीकृत है। आवेदन के मुताबिक उक्त ट्रक को 29 अगस्त 2026 की रात करीब 11:22 बजे तमकुहीराज पुलिस ने पकड़ा था। इसके बाद वाहन को पुलिस की निगरानी में खड़ा किए जाने की बात कही गई।
वाहन स्वामी के अनुसार, न्यायालय से ट्रक का रिलीज आदेश मिलने के बाद वह 2 अक्टूबर 2026 को वाहन लेने संबंधित थाने पहुंचा। वहां थाने की ओर से ट्रक की चाबी भी उपलब्ध करा दी गई। चालक ने जब ट्रक को स्टार्ट करने का प्रयास किया तो वाहन चालू नहीं हुआ। इसके बाद ट्रक की जांच की गई तो पता चला कि उसमें लगा सेल्फ गायब था।
यहीं से मामले ने नया मोड़ ले लिया। वाहन स्वामी का कहना है कि जब पुलिस द्वारा ट्रक को कब्जे में लेने के बाद उसे पुलिस के पहरे और निगरानी में खड़ा बताया गया था, तो आखिर ट्रक से सेल्फ कैसे गायब हो गया? उसका कहना है कि ट्रक के जरूरी पुर्जे की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी और सेल्फ कब तथा किन परिस्थितियों में गायब हुआ, इसकी जांच जरूरी है।
वाहन स्वामी अखिलेश ठुकराई द्वारा मामले को लेकर वाहन के जीपीएस रिकॉर्ड का भी हवाला दिया गया है। आवेदन में दावा किया गया है कि 29 अगस्त की रात करीब 11:22 बजे पुलिस द्वारा ट्रक को कब्जे में लिए जाने के बाद भी लगभग छह मिनट तक उसके मूवमेंट की जानकारी जीपीएस में दर्ज होती रही।
वाहन स्वामी का कहना है कि यदि ट्रक को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर पार्किंग में खड़ा कर दिया था, तो उसके बाद जीपीएस में वाहन की गतिविधि कैसे दर्ज हुई? ट्रक के छह मिनट के इस कथित मूवमेंट और बाद में सेल्फ गायब मिलने के मामले को लेकर उसने पुलिस अधीक्षक से पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की है।

पूरे मामले में ट्रक को पुलिस द्वारा कब्जे में लेने का समय, जीपीएस की लोकेशन, थाने में वाहन खड़ा होने का स्थान, उसकी निगरानी, चाबी किसके पास रही और वाहन से सेल्फ कब गायब हुआ, ये सभी बिंदु महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन तथ्यों की जांच और संबंधित अभिलेखों के मिलान से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
वाहन स्वामी ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि 29 अगस्त से 2 अक्टूबर के बीच ट्रक की वास्तविक स्थिति और उसकी गतिविधियों की जांच कराई जाए तथा पुलिस अभिरक्षा में वाहन से सेल्फ गायब होने के मामले में जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
फिलहाल वाहन स्वामी द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस की निगरानी में खड़े बताए जा रहे ट्रक से सेल्फ किन परिस्थितियों में गायब हुआ और जीपीएस में दर्ज छह मिनट के मूवमेंट की वास्तविक वजह क्या थी।
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