हाटा/कुशीनगर। मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत कथा सुनाकर ही होता है। विडम्बना यह है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नही करते है। निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनो सुधार लेते है।
उक्त बाते विकास खण्ड मोतीचक अन्तर्गत ग्राम सभा मुहम्मदा जमीन सिकटिया के बारी टोला पर श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को कथा सुनाते आचार्य पं हरेन्द्र पाण्डेय ने कहा। आगे कहा कि प्रभु जब अवतार लेते है तो माया के साथ आते है साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है। और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जब कि शरीर नश्वर है। कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वही सच्ची भक्ति है । आगे कहा कि किसी भी स्थान पर विना निमंत्रण जाने से पहले इस बात को ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहा आप जा रहे है वहा आपका अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान हो यदि ऐसा होने की आशंका हो उस स्थान पर नही जाना चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो ।
इस दौरान पौहारीशरण मिश्र,पं राम अद्या मिश्र, हरियोम द्विवेदी, गौतम मुनि तिवारी, महानारायण मिश्र, वृजभूषण मिश्र, रामाश्रय तिवारी,विशाल मिश्र, मंजू देवी, मीना देवी,विमला देवी आदि लोग मौजूद रहे।
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