हाटा/कुशीनगर। सामाजिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था “संदेश” हाटा की 305वीं कवि गोष्ठी शनिवार को आरजू अड्डा गौरी चौराहे पर संपन्न हुई,गोष्ठी की अध्यक्षता संदेश के अध्यक्ष त्रिलोकी त्रिपाठी चंचरीक ने किया मुख्य अतिथि वरिष्ठ शिक्षक एवं कवि अभिमन्यु सिंह रहे
गोष्ठी की शुरुआत प्रद्युम्मन कुमार सोनी के सरस्वती वंदना
“नाही मांगी अन धन ना ही हीरा मोती,जरा द हियरा में ज्ञान की ज्योति” से हुई,
असलम बैरागी ने अपने हास्य रचना”प्यार में बुढ़वा भईल बा पागल,घर-घर में होखत बा रोज महाभारत” से गोष्ठी की औपचारिक शुरुआत की,
विनोद पांडेय ने”धन या स्वर्ग की मांग नहीं मां नहीं चाहिए पद वैभव, मांग रहा मां दर्शन दो जय पूर्ण ब्रह्म भारत माता,
शैलेन्द्र असीम ने “चले आते हैं शिव अवरोध सारे तोड़कर जग के,करो नंदी के जैसी तो प्रतीक्षा पूर्ण होती है,
मोहन पाण्डेय ने,”बस्तियों की हर गली यूं धुवा होने लगी,क्या हुआ मेरे शहर को धूप यूं जलने लगी,
एड अब्दुल हमीद आरज़ू ने
“बाद मरने के मेरी कब्र पे आलू बोना,
ताकी महबूब मेरा भूजकर चोखा खाए”से गोष्ठी को खूब हंसाया
गोष्ठी के मुख्य अतिथि अभिमन्यु सिंह ने आज की वर्तमान राजनीति पर करारा व्यंग कहते हुए कहा
“दिल का तो मैं काला हूं बाहर बहुत उजाला हूं,सब से रिश्वत लेता हूं मैं वर्तमान का नेता हूं”
अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन के बाद गोष्ठी सम्पन्न हुई,
गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार व्यंगकार डी के पाण्डेय ने किया
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