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गन्ने की पैदावार बढ़ाने तथा कीटो व बीमारियों से गन्ने की फसल बचाव की दी गई जानकारी

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

May 29, 2023  |  5:04 PM

34 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
गन्ने की पैदावार बढ़ाने तथा कीटो व बीमारियों से गन्ने की फसल बचाव की दी गई जानकारी
  • गन्ने में मथमुड़िया कीट का प्रकोप जून-जुलाई में सक्रिय होता है
  • मथमुड़िया कीट नियंत्रण के लिए किसान ट्राईकोकार्ड का प्रयोग करें
  • ट्राइकोकार्ड के प्रयोग से उत्पादन लागत घटेगी, वातावरण प्रदूषण से बचेगा

कसया/कुशीनगर। गन्ना बोने से काटने तक, गन्ने के किसी न किसी भाग में कभी न कभी कीटों का प्रकोप समय-समय पर होता रहता है। गर्मी के दिनों में गन्ना फसल में अधिक तापक्रम के कारण अप्रैल-मई में अंकुर बेधक कीट “पिहीका कीट” का प्रकोप रहा पिहीका कीट से प्रभावित पौधों के बीच का गोंक-सीका सूख गया जबकि किनारे की दोनों पत्तियां हरी थी। वर्षा होने से गन्ना फसल में लगने वाले पिहीका कीट का प्रकोप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। वर्षा होते ही गन्ना फसल में चोटी बेधक कीट जिसे किसान मथमुड़िया कीट कहते हैं, इसकी सक्रियता बढ़ जाएगी। यह जानकारी उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच गोरखपुर के सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने दी।

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सहायक निदेशक ने बताया कि मथमुड़िया कीट का प्रौढ़ चांदी जैसा सफेद रंग का होता है तथा मादा कीट के उदर भाग पर हल्के गुलाबी रंग के बालों का गुच्छा होता है। पूरे वर्ष में इस कीट की चार से पांच पीढ़ियां पाई जाती हैं। मथमुड़िया कीट की तीसरी पीढ़ी जून से अगस्त तक अधिक नुकसान पहुंचाती है। इस के प्रकोप से 20 से 35% गन्ने की उपज घट जाती है, चीनी परता में भी 0.2 से 4 यूनिट तक की कमी होती है। गन्ने की सभी प्रजातियों में इस कीट का प्रकोप नहीं होता है। प्रभावित पौधों की पत्तियों में क्रमशः तीन छेद दिखाई देते हैं। गन्ने की बढ़वार रुक जाती है, ऊपर की आंखें अंकुरित हो जाती हैं। गन्ना किसान संस्थान पिपराइच द्वारा गन्ना सर्वेक्षण, कीट व रोग नियंत्रण तथा पेडी प्रबंध पर विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है।

मथमुड़िया कीट के जैविक नियंत्रण के लिए सहायक निदेशक ने सेवरहीं शोध संस्थान के कीट वैज्ञानिक डॉ. विनय मिश्रा ने बताया कि मथमुड़िया कीट नियंत्रण के लिए मार्च-अप्रैल मई में अण्ड समूहों को एकत्रित करके नष्ट कर दिया जाए। प्रथम और द्वितीय पीढ़ी से प्रभावित पौधों को खुरपी से काटकर निकाल दिया जाए, गन्ने की अर्ली और सामान्य दोनों प्रजातियां बोयी जाए,जितना अधिक कीटनाशकों का प्रयोग होगा, उतना ही अधिक कीटों का प्रकोप बढ़ेगा क्योंकि मित्र कीट मर जा रहे हैं, वातावरण प्रदूषित होगा पशु और लोग बीमार होंगे, वर्षा काल में ट्राईकोकार्ड का प्रयोग करें मथमुड़िया कीट नियंत्रण होगा। सेवरहीं शोध संस्थान में ट्राइकोकार्ड उपलब्ध है, कार्ड दिया जा रहा है। जून जुलाई-अगस्त में ट्राइकोकार्ड एक माह में दो बार प्रयोग करें। एक कार्ड 1 एकड़ खेत के लिए होगा, डॉ. मिश्रा ने सहायक निदेशक को ट्राई को कार्ड प्रयोगशाला में दिखाया। सहायक निदेशक ने बताया कि जैविक भवन खजनी रोड गोरखपुर कार्यालय से ट्राइकोकार्ड निशुल्क मिल रहा है।

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