कुशीनगर | आज मुस्लिम मर्द अपनी पत्नीयो को खरीदा हुआ नौकरानी समझ कर जुल्म व सितम के पहाड़ ढ़ा रहे है जबकि इस्लाम धर्म मे उनके साथ अदब व ऐहतराम से पेश आने का आदेश दिया गया है । और उनके साथ अच्छे व्यवहार से जीवन व्यापन करने की जोर दी गई है ।
वर्णन- जिला कुशीनगर के प्रशिद्ध धर्म गुरु मौलाना अहमद कमाल अब्दुर्रहमान नदवी ने जिला देवरिया के बघौचघाट हल्का के ग्राम मेहा हरहंग पुर की जामे मस्जिद में एक सभा के कार्यक्रम में खेताब करते हुये उन्होंने कहाँ कि इस्लाम धर्म के दूसरे रीति रिवाज के तरह पत्नियों के साथ अच्छा व्यवहार करना भी जरूरी है । उन्होंने पवित्र किताब कुरआन शरीफ का हवाला दे कर कहा कि पत्नियों के साथ अच्छाई से जीवन व्यापन करो अगरचे तुम को वह अच्छी नही लगती है, हो सकता है कि तुम को कोई चीज ना पसन्द करो और ईश्वर ने तुम्हारे लिए उसमें खैरे कशिर रखा हो । पैग़म्बर के हवाला से उन्होंने कहाँ कि सबसे महान मुसलमान वह है जिसका व्यवहार अच्छा हो । तुम में से सबसे महान वह लोग हैं जो औरतो के लिय बेहतर है। इस्लाम धर्म औरत की राहत व शकुन व हम दर्दी व दिल जोई के लिय तफरीह की इजाज़त देता है । प्रारम्भिक इस्लाम का वाक्या है कि पैग़म्बर मदीना मनौवरा में पधारे है आपके हुजरा के सामने कुछ हब्सि नेजा बाजी का करतब दिखा रहे थे । आपने खातूने जनत हजरत आयशा को इस दृश्य से मज़ा व मनोरंजन के लिए उनका चेहरा अपने कन्धा और सिर के मध्य में रख कर के वह दृश्य दिखा रहे थे। इस तरह से कोई रहीम व रफ़ीक़ बाप अपने बेटी को तमाशा दिखाता है उन्होने कहाँ कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी के मामला में ईश्वर का डर रखेगा वह कभी अपनी पत्नी पर जुल्म नही कर सकता ये हमारे पैगम्बर की ज़िंदगी का नमूना और हमारे पुरखो का अपनी पत्नियों के साथ अच्छा व्यवहार का एक उदाहरण हैं जिसको अपना कर हर घर को स्वर्ग बनाया जा सकता हैं और उसी को न अपना कर के घर को नर्क के ईंधन बनाने से बचाया जा सकता है। ईश्वर से प्राथना है कि हम सबको इस बात से उपदेश मिले ।
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