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कसया: नहरे बेपानी कैसे हो फसलों की सिंचाई,किसान चिन्तित

न्यूज अड्डा कसया

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May 5, 2022  |  10:25 AM

860 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
कसया: नहरे बेपानी कैसे हो फसलों की सिंचाई,किसान चिन्तित
  • प्रेमवालिया माइनर,सपहा माइनर, कुड़वा उर्फ दिलीपनगर,बकुलादह आदि माइनरों में नहीं आ रहा पानी
  • कृषि लागत बढ़ने से टूट रही किसानों की कमर,लागत भी निकलना मुश्किल
  • गन्ना, मक्का, सब्जियों के पौधों की सिंचाई के लिए महंगे साधन पम्पिंगसेट्स का प्रयोग किसानों की मजबूरी

कसया/कुशीनगर। कसया तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली सिंचाई के प्रमुख साधन नहरों के बेपानी होने से किसानों में फसलों के सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गयी है, तपती धूप व लू के थपेड़ों से फसलें सूख रही हैं जबकि कृषि विशेषज्ञ सिंचाई पर विशेष जोर दे रहे हैं,सिचाई को लेकर चिंतित किसान महंगे साधन पम्पिंग सेट्स से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं,जिसके आर्थिक बोझ से किसानों की कमर टूट रही है।केंद्र व प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरु की है।पंचवर्षीय योजना के तहत सिंचाई के लिए बिछी नहरों के जाल बिना पानी बेमतलब साबित हो रहे हैं।साथ ही किसानों की आय दोगुनी का दावा भी सरकार ने किया है लेकिन समुचित सिचाई व्यवस्था नहीं होने से दोगुनी आय की कौन कहे श्रम व लागत भी डूब रही है।एक तरफ कोरोना संकट तो दूसरी ओर रोजी रोजगार में आई भारी कमी के बाद खेती ही आजीविका का एक मात्र साधन किसान परिवारों के लिए रह गया है।खेती के लिए उर्वरक,दवा, जुतायी व श्रम की लागत बढ़ने से लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है।

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कसया तहसील क्षेत्र से होकर गुजरने वाली खजुरिया नहर व उससे निकलने वाली कुशीनगर रजवाहा,मल्लूडीह -प्रेमवालिया माइनर,सपहा माइनर,नौकाटोला माइनर,कुड़वा उर्फ दिलीपनगर,बकुलादह आदि माइनरों में पानी नहीं आने से दर्जनों गांवों के हजारों एकड़ खेतों में खाद,बीज डालकर गन्ना,मक्का, सब्जियों जैसे भिंडी,प्याज,टमाटर, साग,मिर्च,लौकी,कुम्हड़ा,सत्पुतिया, नेनुआ आदि फसलें सिंचाई के अभाव में सूख रही है।पानी छोड़ने को लेकर सिंचाई विभाग द्वारा कई नहरों व माइनरों की अभी तक सिल्ट या झाड़ आदि नहीं साफ कराए गए हैं और मरम्मत भी नहीं हुई है।महंगे पम्पिंगसेट्स से सिंचाई के बाद जब नहरों में पानी आता है तो जर्जर नहरों जगह जगह टूटने से सिंचित फसलें भी डूब जाती हैं।

इस तरह से किसान दोहरी तेहरी आर्थिक संकट की चपेट में आ जाता है।क्षेत्र के किसानो ने नहरों में पानी देने की मांग करते हुए कहा कि फसलों के सिंचाई के समय कभी भी सिंचाई विभाग के जिम्मेदारों द्वारा समय से पानी नहीं दिया जाता है,जिससे मजबूर होकर निजी साधन का उपयोग करना पड़ रहा है जो काफी खर्चीला है।गौरतलब हो कि हर वर्ष सिंचाई के लिए नहरों में पानी न होने का अलाप किया जाता है लेकिन किसी जिम्मेदार कोई कोई फर्क नहीं पड़ता,अब देखना है कि पानी को लेकर किसानों की चिंता का समाधान होता है या नहीं.

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