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कसया: सीओ की अध्यक्षता में गोष्ठी हुआ आयोजित, नए कानूनों के प्रति लोगो को किया गया जागरूक

न्यूज अड्डा कसया

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Jul 1, 2024  |  7:53 PM

51 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
कसया: सीओ की अध्यक्षता में गोष्ठी हुआ आयोजित, नए कानूनों के प्रति लोगो को किया गया जागरूक

कसया। सोमवार को भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 जो एक जुलाई से लागू हो गये हैं। कसया थाना परिसर में सीओ कुंदन सिंह की अध्यक्षता में नए कानूनों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए कसया थाना परिसर में गोष्ठी आयोजित कर जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।एक जुलाई से लागू हो रहे नए कानून के संबंध में आम लोगों को जागरूक करने को लेकर जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं आम लोगों के बीच कानून के नए प्रावधानों के संबंध में पुलिस क्षेत्राधिकारी कसया कुंदन सिंह ने विस्तार से जानकारी दी। ताकि लोगों के मन में पुराने कानून की जो अवधारणा है उसको लेकर आगामी दिनों में किसी प्रकार की भी असमंजस की स्थिति नहीं रहे।जिसमें थानाक्षेत्र के संभ्रांत नागरिक सहित आमजन शमिल रहे। इसके साथ ही पम्फलेट का वितरण किया गया इसके उपरांत कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रगान भी हुआ। गोष्ठी के दौरान क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं आम लोगों के बीच कानून के नए प्रावधानों के संबंध में जानकारी दिया गया। ताकि लोगों के मन में पुराने कानून की जो अवधारणा है उसको लेकर आगामी दिनों में किसी प्रकार की भी असमंजस की स्थिति नहीं रहे।

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सीओ कुंदन सिंह ने बताया कि नए कानूनों के तहत आपराधिक मामलों में फैसला मुकदमा पूरा होने के 45 दिन के भीतर आएगा। पहली सुनवाई के 60 दिन के भीतर आरोप तय किए जाएंगे।एफ़आईआर, जांच और सुनवाई के लिए अनिवार्य समय-सीमा तय की गई है. अब सुनवाई के 45 दिनों के भीतर फ़ैसला देना होगा, शिकायत के तीन दिन के भीतर एफ़आईआर दर्ज करनी होगी।इस नए कानून के तहत घटना क्षेत्र की पुलिस द्वारा पीड़ित को 90 दिनों के अंदर जांच की प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। साथ ही सात दिनों के अंदर चिकित्सक भी इसकी मेडिकल रिपोर्ट भेजेंगे। इसके साथ-साथ ही महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराध से निबटने के लिए 37 धाराओं को शामिल किया गया है। 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी को आजीवन कारावास और मृत्युदंड होगा। यही नहीं, झूठे वादे और नकली पहचान के आधार पर यौन शौषण करना आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आएगा।साथ ही घटना में आईओ के द्वारा घटनास्थल की वीडियोग्राफी, फोटो और अन्य साक्ष्य के रूप में कलेक्ट किया जाएगा।

ताकि अपराधी को सजा दिलाने और मजबूत साक्ष्य के आधार पर न्याय दिलाने में कोर्ट को एक मजबूत आधार दिया जा सके।नए कानून के मुताबिक, आपराधिक मामलों में सुनवाई समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर फैसला आएगा. पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाएंगे. सभी राज्य सरकारों को गवाहों की सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित करने के लिए गवाह सुरक्षा योजनाएं लागू करना होगा.बलात्कार पीड़िताओं के बयान महिला पुलिस अधिकारी की ओर से पीड़िता के अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में दर्ज किए जाएंगे. मेडिकल रिपोर्ट सात दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए.कानून में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर एक नया अध्याय जोड़ा गया है. इसमें बच्चे को खरीदना या बेचना एक जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है.नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.नए कानून में अब उन मामलों के लिए सजा का प्रावधान शामिल है, जिसके तहत महिलाओं को शादी का झूठा वादा करके या गुमराह करके छोड़ दिया जाता है.इसके अलावा नए कानून में महिलाओं के खिलाफ अपराध के पीड़ितों को 90 दिनों के भीतर अपने मामलों पर नियमित अपडेट प्राप्त करने का अधिकार होगा. सभी अस्पतालों को महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराध के मामले में मुफ्त इलाज करना जरूरी होगा.आरोपी और पीड़ित दोनों को 14 दिनों के भीतर एफआईआर, पुलिस रिपोर्ट, चार्जशीट, बयान, इकबालिया बयान और अन्य दस्तावेजों की कॉपी प्राप्त करने का अधिकार है. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से घटनाओं की रिपोर्ट की जा सकेगी, जिससे पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत समाप्त हो सकेगी. साथ ही व्यक्ति एफआईआर को अपने अधिकार क्षेत्र वाले थाने के बजाए भी दर्ज करा सकता है.अब गंभीर अपराधों के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों का घटनास्थल पर जाना और साक्ष्य एकत्र करना अनिवार्य होगा.लिंग की परिभाषा में अब ट्रांसजेंडर लोग भी शामिल होंगे, जो समानता को बढ़ावा देता है. महिलाओं के खिलाफ कुछ अपराधों के लिए जब भी संभव हो, पीड़ित के बयान महिला मजिस्ट्रेट की ओर से ही दर्ज किए जाने का प्रावधान है,नए भारतीय न्याय संहिता में नए अपराधों को शामिल गया है. जैसे- शादी का वादा कर धोखा देने के मामले में 10 साल तक की जेल व नस्ल, जाति- समुदाय, लिंग के आधार पर मॉब लिंचिंग के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा, छिनैती के लिए तीन साल तक की जेल की सजा शामिल है सहित अन्य जानकारी दी।

इस दौरान थानाध्यक्ष कसया गिरिजेश उपाध्याय, क्राइम इंस्पेक्टर ओमप्रकाश सिंह, एसएसआई प्रविंद्र राय, चौकी इंचार्ज कुशीनगर रणजीत सिंह बघेल, हाइवे चौकी प्रभारी बबलू कुमार, कस्बा चौकी प्रभारी गौरव श्रीवास्तव,एसआई संदीप यादव, रूपेंद्र पाल सिंह, विपिन सिंह,सभाजीत सिंह सहित पुलिसकर्मी एवं संभ्रांत लोग मौजूद रहे।

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