कुशीनगर। जनपद में व्यवसायिक मालवाहक वाहनों के आवागमन पर कथित मौखिक एवं अनाधिकृत प्रतिबंध के खिलाफ बुधवार को ट्रांसपोर्ट यूनियन कुशीनगर के बैनर तले बड़ी संख्या में वाहन स्वामी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। वाहन स्वामियों ने आरोप लगाया कि बिना किसी लिखित आदेश या सरकारी अधिसूचना के राज्य मार्गों, जिला मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर उनके वाहनों को रोका जा रहा है, जिससे परिवहन व्यवसाय गंभीर संकट में पहुंच गया है।जिलाधिकारी ने वाहन स्वामियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि इस संबंध में पुलिस अधीक्षक कुशीनगर से वार्ता कर विधि सम्मत एवं व्यावहारिक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
ज्ञापन में ट्रांसपोर्ट यूनियन ने कहा कि उनके सभी मालवाहक वाहन वैध परमिट, फिटनेस, बीमा, टैक्स सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों से लैस हैं और बालू, मोरंग, गिट्टी समेत अन्य निर्माण सामग्री का परिवहन करते हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से पुलिस एवं परिवहन विभाग के कर्मचारी मौखिक रूप से यह कहकर वाहनों को रोक रहे हैं कि व्यवसायिक मालवाहक वाहन केवल राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर ही चलेंगे। जबकि इस संबंध में न तो कोई शासनादेश जारी हुआ है, न ही मोटर वाहन अधिनियम की धारा-115 के तहत कोई अधिसूचना अथवा जिला मजिस्ट्रेट का सार्वजनिक आदेश उपलब्ध कराया गया है। संविधान और मोटर वाहन अधिनियम का दिया हवाला
वाहन स्वामियों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि— भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत प्रत्येक नागरिक को व्यवसाय करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। बिना वैधानिक आदेश के लगाया गया प्रतिबंध इस अधिकार का उल्लंघन है।
मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा-66 के अनुसार वैध परमिटधारी वाहन को परमिट की शर्तों के अनुरूप पूरे राज्य में संचालन का अधिकार है।
धारा-115 के अनुसार यदि सड़क सुरक्षा, यातायात या मरम्मत के कारण किसी मार्ग पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो सक्षम अधिकारी को लिखित आदेश जारी कर कारण एवं वैकल्पिक मार्ग सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है।
बिना वैधानिक आदेश के वाहनों को रोकना कानून की भावना के विपरीत है।
प्रतिबंध से बढ़ा खर्च, महंगा हुआ निर्माण कार्य है।ट्रांसपोर्ट यूनियन का कहना है कि मौखिक रोक के कारण मालवाहक वाहनों को 15 से 40 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे डीजल की खपत, समय और मजदूरी का खर्च कई गुना बढ़ गया है। इसका सीधा असर निर्माण सामग्री के भाड़े पर पड़ा है, जिससे निर्माण कार्य महंगे हो रहे हैं और अंततः इसका आर्थिक बोझ आम जनता पर पड़ रहा है। वहीं परिवहन व्यवसायी और चालक भी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
डीएम से कीं ये प्रमुख मांगें ..!
वाहन स्वामियों ने जिलाधिकारी से मांग की कि वैध दस्तावेजों वाले सभी व्यवसायिक मालवाहक वाहनों का राज्य मार्गों पर आवागमन तत्काल बहाल कराया जाए।
यदि किसी मार्ग पर प्रतिबंध आवश्यक हो तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा-115 के तहत कारण सहित लिखित अधिसूचना जारी कर उसे सार्वजनिक किया जाए तथा वैकल्पिक मार्ग भी निर्धारित किया जाए।
पुलिस एवं परिवहन विभाग को निर्देश दिया जाए कि बिना लिखित आदेश किसी भी वाहन को अनावश्यक रूप से न रोका जाए।
ज्ञापन के अंत में ट्रांसपोर्ट यूनियन ने प्रशासन को 15 दिन का समय देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने को विवश होंगे।
ज्ञापन सौंपने वालों में रहे शामिल
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने वालों में अखिलेश ठकुराई, हेमंत सिंह, मृत्युंजय ठकुराई, शैलेन्द्र ठकुराई, महंथ यादव, ईशरमन शर्मा, गोलू राय, राहुल राय, सत्येंद्र राय, विनय कुमार सिंह, आदित्य ठकुराई, अमरेंद्र राय, राकेश राय, सिंपू राय, अभय राय सहित बड़ी संख्या में वाहन स्वामी मौजूद रहे।
क्या बनेगा प्रशासन और ट्रांसपोर्टरों के बीच सहमति का रास्ता?
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि प्रशासन लिखित आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट करता है तो लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि समस्या जस की तस बनी रही तो मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। ऐसे में आने वाले दिन कुशीनगर के परिवहन व्यवसाय और निर्माण कार्यों के लिए अहम साबित हो सकते हैं।
कुशीनगर। कसया थाना क्षेत्र में दो सिपाहियों पर लगे गंभीर आरोपों के मामले में…
कुशीनगर। जिले के कसया थाने में तैनात दो सिपाहियों पर लगे गंभीर आरोपों ने…
हाटा कुशीनगर: बहुजन समाज पार्टी की एक दिवसीय विधानसभा सेक्टर स्तरीय कार्यकर्ता समीक्षा बैठक…
मथौली बाजार कुशीनगर । जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), कुशीनगर के गणित प्रवक्ता…