कुशीनगर । कानून–व्यवस्था को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाला कुशीनगर इन दिनों एक सकारात्मक बदलाव का गवाह बना हुआ है। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार की कार्यशैली ने न सिर्फ अपराधियों की सांसें अटका दी हैं, बल्कि आम जनता के मन में भरोसे की नई रोशनी जलाई है।
जनता खुले तौर पर कह रही है “एसपी बदलते ही पुलिस बदली, अब न्याय मिलने लगा है।”
इस संवाददाता ने संडे स्पेशल में केशव नाम का भावार्थ और कार्यशैली पर सटीक छाप का वर्णन किया हैं, यहां बताना चाहूंगा कि
धार्मिक ग्रंथों में ‘केशव’ भगवान श्रीकृष्ण का नाम है, जिसका अर्थ है “दुष्टों का संहार करने वाला और सज्जनों की रक्षा करने वाला।” कुशीनगर में तैनाती के बाद एसपी के व्यवहार और कार्रवाई ने इस भावार्थ को जीवंत बना दिया है ,कठोरता अपराधियों पर, संवेदनशीलता पीड़ितों पर।
बताते चले कि पदभार संभालते ही एसपी केशव ने पुलिस की कार्यप्रणाली में गति और धार दोनों बढ़ाई।इनामी और वांछित अपराधियों की लगातार धरपकड़, तस्करी, अवैध कारोबार और गैंग के खिलाफ विशेष अभियान, क्राइम की हर सूचना पर त्वरित रिस्पांस, थानों पर पेंडेंसी कम कराने के निर्देश का नतीजा यह रहा कि जिले में अपराध की जमीन पहले जैसी सुरक्षित नहीं रह गई। समीक्षा बैठकों से लेकर रात्रि निरीक्षण तक, कहीं भी शिथिलता की अनुमति नहीं।
जानकारी रहे कि एसपी केशव कुमार ने यह साफ कर दिया है कि“अपराधी ही नहीं, पुलिस में भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” यही वजह है कि जांच में ढिलाई, सरकारी कर्तव्य में लापरवाही, जनता के साथ दुर्व्यवहार,जैसे मामले सामने आते ही लाइन हाजिरी, नोटिस और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। थानों में अब यह वाक्य आम सुनाई देता है ,“काम करो या कार्रवाई झेलो।”
जनता का भरोसा लौट रहा है,पुलिस और समाज के रिश्ते मजबूत,बीट पुलिसिंग, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, महिलाओं की सुरक्षा, सप्ताहभर सघन चेकिंग और रात में अचानक निरीक्षण इन प्रयासों ने आम लोगों की उम्मीदों को मजबूत किया है। गांवों से कस्बों तक नागरिकों की एक ही प्रतिक्रिया मिल रही है ,“पुलिस का रवैया पहले जैसा नहीं, अब बदल चुका है।” कुशीनगर की सड़कों से लेकर थाना परिसरों तक एक स्पष्ट संदेश गूंज रहा है “अब अपराध करके बचना मुश्किल है।”
अंत में परिवर्तन की एक पूर्ण तस्वीर :
कुशीनगर में कानून–व्यवस्था की दिशा बदल रही है,अपराधी सिहर रहे हैं जनता निश्चिंत हो रही है.और पुलिस महकमा अनुशासन में आ रहा है! और इस बदलाव की धुरी पर एक ही नाम खड़ा है “केशव”!
यही कारण है कि इस समय जिले में आम बातचीत से लेकर सोशल मीडिया तक एक वाक्य गूंज रहा है
“केशव नाम काफी है।”
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