खड्डा/कुशीनगर (न्यूज अड्डा)। खड्डा इलाके के रेता क्षेत्र के हजारों की आवादी को पुर्व की भांति विजली पहुंचाने के प्रयास को शुक्रवार को विराम गया है। नदी व बाल्मीकी जंगल का मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा है। यूपी के अधिकारियों ने दूसरे विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है।
खड्डा उपकेन्द्र से दियारा होकर शाहपुर विन्ध्याचल पुर गाँव के रास्ते मरिचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, शाहपुर ,विन्ध्याचल पुर आदि एवं निचलौल तहसील के सोहगीबरवा क्षेत्र सहित लगभग पचास हजार आबादी तक पूर्व के बर्षों में विजली पहुंचाई जा रही थी। पिछले वर्ष अचानक नदी के तेज कटान से लगभग सत्तर पोल नदी में विलीन हो गये इससे सप्लाई ठप्प हो गयी।विजली विभाग ने सर्वे करके विजली पहुंचाने हेतु लगभग 25 पोल व ढाई किलोमीटर अंडर ग्राउंड केबिल डालने का कार्ययोजना तैयार किया है। परंतु वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने वाइल्ड लाइफ कानून का हवाला देते हुए तार या पोल लगाने की अनुमति नहीं दी। इसे लेकर यूपी के अधिकारियों ने मदनपुर वन रेन्ज की एसीएफ अमिता राज के साथ बैठक हुई। इसको लेकर शनिवार को स्थलीय निरीक्षण के क्रम में विधायक जटाशंकर त्रिपाठी, एसडीएम अरविन्द कुमार, अधीक्षण अभियन्ता कुशीनगर राजेश गुप्ता, एक्सियन सुनील श्रीवास्तव, सीओ शिवाजी सिंह, एस ओ खड्डा रामकृष्ण यादव, जेई अमन कुमार आदि नदी के रास्ते नांव से विवादित स्थल पर पहुँचे, वीटीआर की ओर से सौरभ वर्मा के नेतृत्व में अमिन व वन कर्मचारी मौजूद रहे। संयुक्त रूप से टीम ने स्थलीय व अभिलेख के अनुसार छानबीन किया परंतु जंगल होने व नदी के धारा की वजह से वर्तमान में पोल लगाना संभव नहीं दिखा। इसके बाद टीम वापस हो गयी।
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