Reported By: न्यूज अड्डा डेस्क
Published on: Aug 4, 2021 | 2:56 PM
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बात कई दशको पुरानी है नंदकिशोर मिश्र (Nand Kishor Mishra) ने अपनी राजनीति जीवन की शुरुआत एक संघ प्रचारक के रूप मे किया था और अपनी लोकप्रियता की वजह से वह भाजपा के तरफ से अनेको बार चुनाव लङे लेकीन उनको पहली जीत एक विधायक के तौर पर 1991 मे मिली और अपनी लोकप्रिय छवि के बल पर 1993 मे भी इन्होने पुनः दुसरी विजय हासिल कर अपनी जनता के बीच इन्होने एक अलग छाप छोङा।
तमकुहीराज विधानसभा (Tamkuhiraj Vidhansabha) की जनता की मानें तो पुर्व विधायक नंदकिशोर मिश्र (Nand Kishor Mishra) की जीवन बेहद ही संघर्षपूर्ण रही है जिसके बदौलत यह दो बार विधायक पद तक भी पहूँचे हैं इस जीत की फलस्वरुप यह रहा है की आज भी क्षेत्र की जनता उनको विधायक जी के नाम से नही बल्कि विधायक जी ही बोलकर संबोधन करती है इतना ही नही यह एक ऐसे विधायक भी रहे हैं जिन्होने कभी भी अपनी आत्मसम्मान से कोई समझौता नही किया है और इन्होने अपनी आत्मसम्मान की व्यक्तित्व की पहचान अभी भी बरकरार रखे हुए हैं एवं इसको जो और खास बनती है वो ये की पुर्व मे अपनी कार्यकाल के दौरान से लेकर अबतक पुर्व विधायक नंदकिशोर मिश्र कभी भी किसी भी थाने पर पैरवी हेतु जाना पंसद नही किये हैं वहीं पुर्व मे रहे विधायक और बङे छवि वाले अनेको कद्दावर नेतागण के बीच इन्होने अपनी छवि बरकार रखते हुए यह अपनी अगल पहचान बनाने मे कामयाब रहे हैं और क्षेत्र मे हो रहे समस्याओ के मद्देनजर धरना प्रदर्शन से लेकर गरीब मजलूमो की मदद कर उन्ही गरीब जनता के दिलो पर राज करने लगे और आजतक वह सबके दिलो पर एक मान सम्मान के साथ राज कर रहे हैं!
एक समय गन्ना फैक्टरी का बंद हो जाना फिर क्षेत्र के किसानो का परेशान होना जैसे समस्याओ से निदान दिलाते हुए इन्होने खङे गन्ने की सर्वे कराकर भुगतान करना जैसै बिहङ कार्य को भी अंजाम दिया हुआ हैं इतना ही नही अपने ही सरकार मे जमुआन पुल की एप्रोच के लिये धरना प्रदर्शन करना भी सामिल है वहीं आज की सोशल साईट की दबा दबा को देखें तो यह उस समय का नेता रहे हैं जब ना कोई सोशल मीडिया था ना ही कोई वाटसप समूह था और ना ही कोई बङे बङे होडिंग लगा करते थे लेकीन अपनी कार्यो के बल पर और बिना प्रचार प्रसार किये ही सबके दिलो पर पुर्व विधायक नन्द किशोर मिश्र राज करते रहे हैं और आज भी काफी हद तक जन जन मे अपनी पकङ रखते भी हैं जिसकी एक बानगी विधानसभा चुनाव 2017 मे भी देखा गया है जब बीजेपी से लगातार पांच बार चुनाव लङ दो बार जीत हासिल कर चुके श्री नंदकिशोर मिश्र जी का टिकट कुछ अंदरूनी कारणो के चलते काट वर्तमान भाजपा मे प्रदेश मंत्री श्री जगदीश मिश्र उर्फ बाल्टी बाबा जी को दे दिया गया और फिर क्या था नन्द किशोर मिश्रा ने पार्टी से नाराज हो निर्दल ही मैदान मे उतर सबको चौंका दिया और अपने और अपने कार्यकर्ताओ के बल पर 24 हजार वोट लाकर बीजेपी की हार की मुख्य कारण भी बनें क्यो की श्री बाबा जी का बीजेपी से बाहर होना क्षेत्र के काफी हद तक ब्राह्मण समाज लेकर अन्य वर्ग को भी नाराज करने जैसा था जिसका बीजेपी को हार का सामना कर भुगतना पङा! नंदकिशोर मिश्र (Nand Kishor Mishra) इतने पर ही नही रूके इन्होने अपनी संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए और उस संघर्षमयी जीवन की अनमोल धरोहर जिसका 35-40 वर्ष भाजपा के लिये निछावर कर इस आस मे पार्टी के साथ जनसेवा मे लगे हुए थे की इस बार भी पार्टी इनपर विस्वास जतायेगी लेकीन उससे उल्ट होते देख मन खिन्न हो गया जिसे याद करना थोङा हिचक तो होना लाजिमी भी था लेकीन अपनी अनुभव की हिम्मत को आगे की सिढी बनाते हुए उत्तर प्रदेश के पुर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व मे इन्होने समाजवादी पार्टी को ज्वाईन कर पुनः जनसेवा मे लग गये। वर्ष 1980 से सेवरही विधानसभा जो की अभी तमकुहीराज है नन्द किशोर मिश्र चुनाव लङते आ रहे हैं वहीं अगर आज की परिवेश पर नजर डालें तो आज भी ब्राह्मण समाज इन्हे अपना नेता जरूर मानते हैं.
FAQ:
जानिये कौन हैं नंदकिशोर मिश्र, नन्द किशोर मिश्र का जीवन परिचय!, Nand Kishor Mishra, NAND KISHORE MISHRA. TAMKUHI RAJ
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