कुशीनगर। जनपद के कुछ क्षेत्रों में धान काटने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। धान की कटाई के तुरंत बाद ही गेहूं की बुवाई के लिए कुछ किसान बंधु पराली को खेतों में ही जला देते हैं जिससे मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं एवं खेत की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही प्रदूषण की समस्या भी उत्पन्न होती है। पराली जलाने के दोषी पाए जाने पर किसानों पर रुपए ढाई हजार से ₹15000 तक जुर्माना लग सकता है।
पराली जलने की घटना की निगरानी ग्राम पंचायत स्तर तक गठित सचल दस्तों एवं सेटेलाइट के माध्यम से की जाएगी। सेटेलाइट के माध्यम से अग्नि जनित स्थान की भौगोलिक स्थिति अक्षांश व देशांतर सहित दस्तों को प्राप्त होगी जिनकी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित किसानों पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारी महोदय द्वारा विस्तृत दिशा निर्देश राजस्व, कृषि, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग को जारी किए जा चुके हैं। जिला प्रशासन द्वारा जनपद के किसान भाइयों से अपील की जाती है कि वह पराली को जलाने की बजाय उसे खेत में ही गला कर खाद के रूप में इस्तेमाल करें एवं दंड की कार्यवाही से बचें। पराली जलाने वाले किसानों को अन्य राजकीय योजनाओं यथा राशन, किसान सम्मान निधि आदि के लाभ से वंचित करने की भी कार्यवाही की जाएगी।
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