सुकरौली/ कुशीनगर। विकास खण्ड सुकरौली के पिपरा उर्फ तितला में सार्वजनिक पोखरे के जमीन पर हुए कब्जे पर विरोध जताते हुए नर्मदा प्रजापति और वीरेंद्र सिंह ने स्थानीय तहसील से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों के सामने बात को रखा था. यहां सुनवाई नहीं होते देख उच्च न्यायालय में मामले को जनहित याचिका दाखिल कर बताया गया कि 0.292 हेक्टेयर अराजी नं 221 पोखरी के नाम है, जिस पर कई परिवार द्वारा जबरदस्ती पक्का निर्माण कर लिया गया है. हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल प्रभाव से स्थानीय प्रशासन को कार्यवाई के लिए आदेशित किया। हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुये जिला अधिकारी कुशीनगर को सीलबंद रिपोर्ट के साथ 11 अप्रैल को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया ।
हाईकोर्ट द्वारा निर्देश जारी किए जाने पर जिलाधिकारी कुशीनगर ने तत्काल प्रभाव से उक्त मामले में तहसील प्रशासन को करवाई के निर्देश दिए। जिससे हरकत में आए तहसील प्रशासन ने राजस्व टीम लगाकर पुनः पोखरे की जमीन का पैमाइश करा कर अतिक्रमण की परी क्षेत्र को चिन्हित कर पुलिस बल के साथ पोखरी पर किए गए अतिक्रमण को पुनः हटवाया।
हाटा तहसीलदार सुमित सिंह ने बताया कि पिछली कार्रवाई से याची कर्ता असंतुष्ट थे, पुनः हाईकोर्ट में अपील दायर किए थे जिसके तहत आज पोखरी पर किये अतिक्रमण पर कार्रवाई करते हुए लोगों का मकान गिराया गया।
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