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कुशीनगर: प्रधान जी के कृपा से मलाई काट रहे सफाई कर्मी

Ved Prakash Mishra

Reported By:

Nov 3, 2021  |  12:34 PM

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कुशीनगर: प्रधान जी के कृपा से मलाई काट रहे सफाई कर्मी

हाटा/कुशीनगर। गांव की साफ -सफाई के लिए जनपद में हजारों सफाई‌ कर्मियों की तैनाती की ग ई है।इन कर्मचारियों पर प्रदेश सरकार का करोड़ों रूपये‌ वेतन के रूप में खर्च होता है।इसके बावजूद गांवों में साफ_सफाई की हालत बद से बदतर बनी हुई है।

इस तरफ‌ प्रशासन का भी ध्यान नहीं जा रहा है। पूव॔वर्ती ब ०स०पा० शासन काल में गांवों की साफ -सफाई के लिए सफाई कर्मियों की भर्ती की ग ई‌‌ थी।कुशीनगर जनपद में हजारों ग्राम पंचायतों के राजस्व ग्रामों को स्वच्छ रखने के लिए हजारों सफाई कर्मियों की तैनाती‌ की ग ई है।इन सफाई कर्मियों के वेतन के रूप मेंप्रति महीने करोड़ों‌ रूपये खर्च हो रहा है।इस समय सफाई‌ कर्मियों का वेतन लगभग २८.हजार रुपये मासिक है।इस तरह गांवों को‌ चका-चक रखने के लिए मात्र कुशीनगर जनपद में ही करोड़ों‌ रूपये खर्च‌ किया जा रहख है।हकीकत यह है कि किसी भी गांव में सफाई‌ ब्यवस्था सन्तोष जनक नहीं है। गांवों में चारों तरफ गन्दगी मुंहबाये सरकार को‌ मुंह चिढ़ा रही है,फिर भी‌ जिम्मेदार‌ हैं कि‌ उन्हें हकीकत देखने व जानने की फुर्सत ही नहीं है। ऐसे में सरकार द्वारा करोड़ों‌ रूपया खर्च‌ किया जाना बेमतलब साबित हो रहा है।गांवों में तैनात सफाई कर्मी‌ ग्राम प्रधानों के रहमोंकरम से मलाई काट रहे हैं। वे कभी-कभार ही गांवों में आते हैं,और प्रधान जी लोगों को सलाम ठोक कर चले जाते‌ हैं।बहुत अधिक दबाव पड़ने पर सफाई कर्मी खुद सफाई करने की बजाय मजदूर रखकर यहां- वहां‌ घास पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करा देते हैं।‌लोगों‌ का कहना है कि अगर उन्हें खुद काम‌ नहीं करना‌ है त़ो उनको हटाकर क्यों न उसी की नियुक्ति कर दी‌ जाय‌‌ जो सफाई कर्मी की जगह काम करते हैं।ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत नहीं की जाती।‌शिकायत तो वह‌‌। करते ही हैं,मगर‌ जिन्हेंं लापरवाह सफाई कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करनी है,‌वे भी उन पर मेहरबान रहते हैं, जिसके चलते ग्रामीणों‌‌ द्वारा की जाने वाली शिकायतें महज शिकायतें‌ बन कर ही‌ रह जाती है।अगर यह हाल कुशीनगर जनपद का‌ है तो पूरे प्रदेश पर‌ सरकार का कितना पैसा खर्च हो रहा होगा।यही हाल कुशीनगर जनपद के हर गांव की है,जहां सफाई कर्मियों द्वारा बर्षों से गांवों में गन्दे‌ नालियों‌‌ की साफ-सफाई नहीं की जा रही है।‌गांवों में मौका देखने‌ से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि‌ गांवों में संक्रामक बीमारियां फैलने की प्रबल सम्भावना बन ग ई है।‌जो सफाई कर्मियों का‌ घोर लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है।

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