पडरौना/कुशीनगर। राम ही रहीम है और रहीम ही राम है। दोनों नामों में फर्क करेंगे तो नफरत बढ़ेगी और दोनों नामों को एक समझेंगे तो अमन और शांति होगी। धर्म के नाम पर किसी भी मजहब के लोग अगर नफरत फैलाने का कार्य करते हैं तो वह गलत है। भारत में रहने वाला किसी भी धर्म का क्यों न हो वह पहले हिंदुस्तानी है। सरहद पर हिंदू ही नहीं मुसलमान सैनिक भी देश की रक्षा करने में पीछे नहीं हैं। कुशीनगर में मुस्लिम समुदाय के कारीगर हिंदुओं के प्रमुख दशहरा त्योहार में धू धू कर जलने वाले बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को पडरौना शहर के जगदीश गढ़ स्टेट राज परिवार से कुंवर साहब अपने हाथों दहन होने वाले रावण को जनपद के खड्डा क्षेत्र के रहने वाले कारीगर रूप दे कर कुछ इस तरह का एकता और भाईचारे का संदेश दे रहे हैं।
पडरौना में बुराई के प्रतीक का पुतला बनाने वाले कुशीनगर में खड्डा के मुख्य कारीगर मोहम्मद झिनमिन राईनी भी यही सोच रखते हैं। एक सप्ताह से वह पडरौना राज दरबार के ग्राउंड में कारीगर खड्डा के ही सफायत अंसारी और तिलकू अंसारी के साथ भाईचारे का संदेश देते हुए पुतले बना रहे हैं। इनके मुताबिक एकजुटता में एकता है। लिहाजा सभी को कौम और खुद के विकास के लिए दोस्ती का रास्ता अपनाना चाहिए। जगदीश गढ़ स्टेट परिवार से जुड़े आयोजन समिति के सदस्य शमशेर मल्ल ने कहा कि पडरौना स्टेट गढ़ राज दरबार के ग्राउंड में पहले रामलीला का मंचन भी होता था। इसके बाद विजयदशमी के अवसर पर रावण जलाने का सिलसिला परंपरा के अनुसार राज परिवार के तरफ से किया जा रहा है। इसकी ऊंचाई इस बार मात्र 52 फीट होगी।
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