खड्डा/कुशीनगर। गण्डक नदी अपने पूरे रो में दिख रही है। गण्डक नदी में पानी का जलस्तर बढ़ने से तटबंधों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। एहतियात के तौर पर गंडक नदी की प्रलयकारी बाढ़ से बचाव के लिए बने छितौनी तटबंध में रेनकट से बने गड्ढे तथा रैट होल नहीं भरे जा सके हैं। झाड़ियों की सफाई न होने से भेड़िहारी मदनपुर से आगे महराजगंज जनपद में चन्दा के पास छितौनी तटबंध के 0.200 किमी.बांध के नीचे से साइफन के बगल से बंधे में लगभग 3 मीटर होल हो गया है। गण्डक नदी से पानी का बहाव बंधे के नीचे से लगातार पानी का बेग सिंहई माइनर में गिर रहा है। बांध के टूटने की आशंका प्रबल हो गई है। तेज बारिश व बाढ़ से बंधे को नुकसान पहुंचने की आशंका से ग्रामीण भयभीत हैं और लोग राहत व बचाव कार्य खुद करते देखे जा रहे हैं। सुबह बांध के नीचे से पानी का रिसाव शुरू होकर बुधवार देर शाम बेग से सिंसई माइनर में गिर रहा है। बाढ़ खण्ड के एसडीओ मनोरंजन कुमार, जेई आदि मौके पर पहुंचकर बांध को बचाने के कवायद में जुटे हुए हैं।
इन गांवों के लोग बांध टूटने का खतरे को लेकर है हलकान: महराजगंज जनपद के चन्दा गुलरभार, कलनहीं, ढोमा, चरिघरवा, बीन टोला, बढ़ता आदि टोले के लोग बांध पर पहुंचकर बचाव के उपाय ढूंढ रहे हैं। तो वहीं बांध टूटने से कुशीनगर के मदनपुर भेड़िहारी, बुढ़वा जंगल, सिंसईं दधिचि, सारंगछपरा, तुर्कहां से सोहरौना आदि गांवों के लोग बाढ़ से प्रभावित हो जाएंगे।
बिभाग के साथ खाली, नहीं है बंधे पर कोई बचाव सामग्री: बाढ़ खण्ड छितौनी तटबंध के बंधे के रिसाव पर खाली हाथ बचाव कार्य में जुटा हुआ है। बांध पर नरकट व झाड़ियो के बीच कोई बचाव सामग्री उपलब्ध नहीं है। न ही डंप के लिए वहां बोल्डर व पत्थर है और न ही बालू व मिट्टियों से भरे बोरों का प्रवंध है। जानकारों की मानें तो रात में कहीं रिसाव बढ़ा तो बंधे को बचाया नहीं जा सकता है।
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