कुशीनगर। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन का सजीव प्रसारण किया गया। मुख्यमंत्री ने आधुनिक भारत के निर्माण में शिक्षा को एक सशक्त माध्यम के रूप में लाने वाले देश के प्रथम उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित किया ।
उन्होनें अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल सैद्धांतिक ना होकर व्यवहारिक एवं तकनीकी होना चाहिए । यह छात्रों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। शिक्षा जगत में बहुत कुछ करने की संभावनाएं हैं, थोड़े प्रयास की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एक समय था जब शिक्षकों की आपूर्ति का केंद्र उत्तर प्रदेश हुआ करता था किंतु बीच में सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने के कारण व जवाबदेही पूर्ण कार्य नहीं करने के कारण गिरावट आई। उन्होंने कहा कि जब जवाबदेही के साथ कार्य प्रारंभ हुआ तो सकारात्मक परिणाम देखने को मिले, भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई, स्कूल चलो अभियान, ऑनलाइन एजुकेशन, पोर्टल का विकास किया गया। सीएम ने कहा कि शिक्षक समाज के संयोजक होते हैं, राष्ट्र के निर्माता होते हैं।शिक्षकों को बच्चों को हर चुनौती के योग्य बनाने की तैयारी करनी चाहिये। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ाने का कार्य करें। समाज को जोड़ने का कार्य करें।इस अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित शिक्षकों के सम्मान समारोह में सांसद कुशीनगर विजय कुमार दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों का सम्मान आदिकाल से समाज करता आया है। शिक्षक को गुरु का दर्जा मिला और उसे ईश्वर के ऊपर स्थान दिया गया। पूर्व के समय में विद्यार्थियों और शिक्षकों का संबंध सम्मान और स्नेह का था, उसमें धीरे-धीरे गिरावट आई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राथमिक विद्यालय के स्वरूप का तुलनात्मक अध्ययन करने से पूर्ववर्ती व्यवस्था से अंतर साफ नजर आता है। शिक्षकगणों का दायित्व बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं बल्कि राष्ट्रीयता के भाव को मजबूत करना, सामाजिकता के बारे में बताना, सामाजिक कार्यों के अर्थ को समझाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षक द्वारा ऐसी शिक्षा प्रदान की जाए कि छात्र/छात्रा आगे चलकर नौकरी के पेशे को अपनाने के साथ-साथ समाज के दायित्व का भी बखूबी रूप से निर्वहन कर सके। सांसद ने कहा कि शिक्षा जगत को डिजिटलाइजेशन, स्मार्टफोन, टैबलेट से सुसज्जित किया गया।
आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से आजादी दिलाने वाले सपूतों के बारे में भी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशाल इमारत की कल्पना तभी की जा सकती है जब नींव मजबूत हो और आज शिक्षक के कंधों पर बच्चों की नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी है।इस अवसर पर जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम द्वारा भी उपस्थित शिक्षकों को सम्मानित किया गया व बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की गई।इस अवसर पर जिला भाजपा अध्यक्ष प्रेमचंद्र मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा विभाग में निरंतर गुणात्मक सुधार देखने को मिला है। शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो निरंतर चलती रहती है। शिक्षकों की जाति नहीं पूछी जाती उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को अपनी पूरी प्रतिभा का उपयोग छात्रों के जीवन में करना चाहिए। सरकार के द्वारा आधारभूत सुविधाएं प्रदान की जा सकती है किंतु प्रतिभा का विकास शिक्षकों के द्वारा ही संभव है।इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ साथ शिक्षकों को पुरस्कृत व सम्मानित भी किया गया। इस क्रम में राज्य अध्यापक पुरस्कार से संविलियन विद्यालय रामपुर बगरा सेवरही के सहायक अध्यापक अखिलेश तिवारी को सम्मानित किया गया। अन्य शिक्षक सत्यजीत द्विवेदी, आकांक्षा, बलिराम, रामायण कुमार यादव, सुनील कुमार त्रिपाठी, राम प्रकाश पांडेय, जितेंद्र कुमार सिंह, रश्मि सिंह तोमर, मानवेंद्र त्रिपाठी, चंद्रहास मिश्र, अजय कुमार तिवारी, मोहम्मद इजहार अंसारी, संजीव कुमार, संतोष कुमार शर्मा, सुनील कुमार, वीरेंद्र कुशवाहा, विनोद कुमार शर्मा, देवेंद्र कुमार पांडेय, योगेंद्र शुक्ल, अनिल कुमार शर्मा, अजय कुशवाहा, बागेश्वरी मिश्रा को भी सम्मानित किया गया।इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी गुंजन द्विवेदी, बेसिक शिक्षा अधिकारी कमलेंद्र कुशवाहा, भाजपा जिला उपाध्यक्ष विजय शुक्ला, चंद्र प्रकाश चमन तथा शिक्षक गण, कर्मचारी व स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।
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