कसया/कुशीनगर। विवेकानंद के आध्यात्म में वैज्ञानिकता है वह वैज्ञानिकता धर्म को आज के समय में हमारे करीब लाती है। विवेकानन्द ने धर्म को व्यवहारिक धरातल पर उतारकर तार्किक आधार प्रदान किया। विवेकानन्द ने अपनी संस्कृति, धर्म, विश्वास व परम्परा पर गर्व करने की प्रेरणा दी। उक्त बातें बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर के पूर्व प्राचार्य डॉ0 अमृतांशु शुक्ल ने स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर नयी दिशा पर्यावरण सेवा संस्थान द्वारा समकालीन परिप्रेक्ष्य में युवा : चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर आयोजित फेसबुक ऑनलाइन व्याख्यान में कही। डॉ0 शुक्ल ने आगे कहा कि युवाओं द्वारा अपने कर्म का क्या, क्यों और कैसे की दृष्टि से मूल्यांकन जरूरी है। इसके अभाव में युवा लक्ष्य केंद्रित नहीं होता और भटक जाता है। उन्होंने समाज को सम्बोधित करते हुए जोर देकर कहा कि हमें अपने बच्चों को निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। यदि बच्चों को निर्णय में भागीदार नहीं बनाया जाएगा तो उनमें जिम्मेदारी नहीं आएगी।
इस व्याख्यान में डॉ0 रामभूषण मिश्र, डॉ0 सीमा त्रिपाठी, साधना शुक्ला, डॉ0 प्रतिभा तिवारी, डॉ0 निगम मौर्य, डॉ0 शत्रुघ्न सिंह, अभय शुक्ल, निशा पांडेय, विवेक राय, गरिमा मिश्रा, बालेंदु पांडेय, सुजाता त्रिपाठी, प्रज्ञा राय, कृष्ण कुमार मिश्र, हिमांशु त्रिपाठी, ऋषिकेश मिश्र, सीए अंजनी नंदन सिंह, अमित कुमार गुप्ता, अफजल अली, नागेंद्र सिंह, अभिषेक श्रीवास्तव, सत्येंद्र मिश्र, इन्द्र मिश्र, शुभम पांडेय, मयंक मणि, अभिलाषा मिश्रा सहित अधिकांश लोग जुड़े रहे। व्याख्यान के अंत में संस्थान कार्यकारी अध्यक्ष डॉ0 गौरव तिवारी व सचिव डॉ0 हरिओम मिश्र ने व्याख्यान देने हेतु डॉ0 शुक्ल का एवं व्याख्यान से जुड़ने वाले सभी सहभागियों के प्रति आभार प्रकट किया।
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