मल्लूडीह/कसया । जैसे जैसे दुनिया की रफ्तार बढ़ती जा रही है वैसे वैसे लोगो के लिए संसाधन भी मुहैया होता जा रहा है । परंतु बढ़ते संसाधन के साथ साथ लोगो को जाम से भी दो चार होना पड़ रहा है । शायद ही कोई हो जो जाम की स्थिति से दो चार न हुआ हो और उस जाम में लोगो की उम्मीद और उनकी आंखे सबसे पहले ट्रैफिक व्यवस्था में लगे ट्रैफिक पुलिस को ढूंढती है ताकि उन्हें उस जाम से मुक्ति दिलाए तथा उन्हें उनके गंतब्य तक जाने में उनकी मदद करे ताकि वो अपने कामों तथा अपने गंतव्य तक सही समय से पहुंच सके । शर्दी , गर्मी तथा बरसात किसी भी मौसम की बात कर ले नगर को जाम से मुक्ति दिलाने में इन ट्रैफिक पुलिस का अहम रोल होता है । कसया अंतर्गत गांधी चौक पर लगने वाले जाम से शायद ही कोई अछूता हो । दोपहर के समय लगभग 2 बजे के आस पास स्कूल की छुट्टी होने के बाद का ट्रैफिक तो एक युद्ध स्तर पर चलता है । बात सपहा रोड की करे तो लोगो का दिल काप जाता है उस जाम में फंसकर । बावजूद इसके कसया ट्रैफिक पुलिस को न ही आप सही तरीके से पीपीई कीट पहने देख सकते है और न ही गाड़ियों से सुरक्षा के लिए कोई ऊंचा स्थान जहां से यह अपना काम सुचारू रूप से कर सके । दिन भर के शोर शराबे तथा उड़ती धूल धकड़ से होने वाले बीमारियों से इन्हे रोज गुजरना पड़ता है । गाड़ियों के तेज शोर तथा हॉर्न से इनके कानो पर क्या असर पड़ता है यह किसी से छुपा नहीं है ।
सर्वे के मुताबिक ट्रैफिक पुलिस सबसे ज्यादा बहरेपन का शिकार तथा लंग कैंसर से पीड़ित हो जाए है । बावजूद इसके इन्हे सही ढंग से पीपीई कीट मुहैया न कराना सिस्टम पर सवालिया निशान है ।
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