कुशीनगर ।गन्ना बहुल इलाका होने के कारण कुशीनगर जिले में चिनीमिल की संख्या 4 है। इन दिनों किसानों की सुविधाओं को देखते हुए उनका संचालन भी शुरू करा दिया गया है। लेकिन मिलों के संचालन के बाद जिम्मेदारों की मनमानी से संचालित मनको से बड़े ट्रालो का प्रयोग आम लोगो की ज़िंदगी को खतरे में डाल रही हैं। उसी के साथ कृषि कार्यो के लिए रजिस्टर्ड ट्रैक्टरो के काटो से मिल तक गन्ना ढुलाई कराने के कमर्सिअल प्रयोग से सरकार को भी टैक्स का चुना लगा रही। आरटीओ ने अब मानकों को दरकिनार करने वाले ट्रालो के संचालन पर पूर्णतः रोक लगाने की बात कही है चीनी मिल द्वारा मामले को दरकिनार करने पर सख्त कार्यवाही की बात कही है।
चिनीमिलो के द्वारा किसानों को सुविधाएं देने के लिए इस बार चीनी मिलों का संचालन पहले ही कर दिया गया है। तो वही दूर दराज के इलाकों में किसानों को परेशान ना होना पड़े इसके लिए काटा लगवाया जाता है। लेकिन जैसे ही चीनीमिलो का संचालन शुरू होता है किसान ट्रैक्टर ट्राली से गन्ना मिल से संचालित काटो या चीनीमिलो में ले जाते हैं। ट्रालियों के पीछे कोई रिफ्लेक्शन या बैकलाइट नहीं होने से कई बार कोहरे में आने वाली गाड़ियां उन्हें देख नहीं पाती। जिससे दुर्घटना बढ़ती है। हालांकि या नियम में है कि ट्रालियों के पीछे रिफ्लेक्टर लगाए जाए ताकि वह पीछे से आई हुई गाड़ी देखकर निकल सके। लेकिन किसानों की गाडियो पर कोई रिफ्लेक्टर नही होता। चीनी मिल प्रबंधन की मनमानी इतने पर ही खत्म नहीं होती। कांटों से मिलो तक लाने के लिए मिल प्रबंधन अपनी व्यवस्था करता है। जिसका नियम है की ट्रैकों से उसकी धुलाई हो क्योंकि ट्रैकों में जरूरी लाइट और मानक तय होता है। जिससे लोगों को अंदाजा मिल जाता। पर कुशीनगर जिले में मिल प्रबंधन ट्रैकों का प्रयोग कोरमपूर्ती बस करता, क्योंकि उसके लिए सरकार को टैक्स आदि मिलाकर महंगी पेमेंट देनी पड़ती है। पैसा बचाने के लिए मिल प्रबंधन के द्वारा गन्ना ढोने में दूनी या तीन गुने आकर के अवैध ट्रालो का निर्माण कराया जाता है। उन्हें खींचने के लिए ट्रैक्टर का प्रयोग होता। जो ट्रैक्टर कृषि कार्य हेतु रजिस्टर्ड है। पर कमर्शियल कामों में कुशीनगर जिले में इसका अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है। जिससे सरकार को मिलने वाले टैक्स की चोरी होती वही दूसरी ओर ट्रैक्टर से जुड़े इन ट्रालो को कई बार ओवरटेक करने में गलत अंदाज लगता हैं। बीते कुछ वर्षों से अबतक ईन ट्रालो के कारण हुई दुर्घटनाओ में दर्जनों से भी ज्यादा लोग अपनी या तो जान गवा चुके या अपंग हुए हैं। लेकीन यातायात विभाग अवैध ट्रालो के आकार और ढुलाई पर कृषि और किसानों का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ देता हैं। जबकि किसानों का काटा से मिलो तक लाने का जिम्मा ही नही होता यह कार्य पूरी तरह कमर्शियल हैं। अब ट्रालो का प्रयोग ढुलाई ले अधिकतर प्रयोग हो रहे है।
कि विभाग ने सभी मनको के विपरीत बने ट्रालो से ढूलाई न करने का निर्देश सभी चीनी मिल को दिया गया है। साथ ही किसानों की ट्रालियों पर भी रिफ्लेक्टर लगाने के निर्देश दिए गया है। अभियान चलाकर भी इसपर कार्य हो रहा है। अगर कही भी मानकों को दरकिनार करके ट्रालो का प्रयोग होगा तो उसपर सख्त कार्यवाही होगी।
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