कुशीनगर। विमर्श साहित्यिक संस्था पडरौना की 36वीं और मधुर साहित्य सामाजिक संस्था लक्ष्मीगंज की 88वीं काव्यगोष्ठी संयुक्त रूप से सम्पन्न हुई। काव्यगोष्ठी का आयोजन सरस्वती बालविद्या मंदिर लक्ष्मीगंज के सभागार में हुआ। काव्यगोष्ठी में जनपद कुशीनगर के विभिन्न क्षेत्रों से आये अतिथि कवियों सहित स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ प्रस्तुत किया।
काव्यगोष्ठी का आरंभ मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और वाणी वंदना से हुआ। तत्पश्चात अश्विनी द्विवेदी ने अपनी रचना पढ़ी :
‘पानी हुआ है महँगा गॉव-शहर में,
सस्ता हुआ है खून, बहाने लगे हैं लोग।’
‘जब-जब जिनगी के चादर पर
पेवना खूब सटाला,
तब-तब गीत लिखल जाला।’
गीतकार चन्द्रेश्वर परवाना के लिखे इस गीत की धीरज राव ने सस्वर प्रस्तुति दी।
मदर्स डे के अवसर पर मॉ की महत्ता को प्रदर्शित करते हुए विमर्श साहित्यिक संस्था पडरौना के अध्यक्ष आर०के०भट्ट बावरा ने पढ़ा :
‘सबने भर पेट खाया, आधी पेट खाई मॉ।’
मदन मोहन पाण्डेय जी ने पढ़ा :
मॉ प्यार देती है, दुलार देती है,
राई लोन से नजर उतार देती है।’
काव्यगोष्ठी में गोमल यादव, उगम चौधरी मगन, सुरेन्द्र गोपाल, मधुसूदन पाण्डेय, जयकृष्ण शुक्ल, बलराम राय, जगदीश कुश्वाहा, संतोष संगम, नन्दलाल सिंह कांतिपति आदि कवियों ने कविता पाठ प्रस्तुत किया।
काव्यगोैष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि मदन मोहन पाण्डेय ने की। प्रज्ञा रेडियो के प्रवन्ध निदेशक परशुराम श्रीवास्तव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। सरस्वती बालविद्या मंदिर लक्ष्मीगंज के मुख्य आचार्य राकेश पाण्डेय काव्यगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि थे जबकि काव्यगोष्ठी का संचालन युवा कवि अशोक शर्मा ने किया।
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