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नारायणी का जलस्तर घटा, दियारा में दुश्वारियां बरकरार

Sanjay Pandey

Reported By:

Sep 29, 2026  |  10:26 AM

28 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
नारायणी का जलस्तर घटा, दियारा में दुश्वारियां बरकरार
  • 5.43 लाख क्यूसेक से घटकर 1.91 लाख क्यूसेक हुआ डिस्चार्ज, गांवों में अब भी बाढ़ का पानी

खड्डा, कुशीनगर। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद उफनाई नारायणी नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। बाल्मीकि गंडक बैराज से पानी के डिस्चार्ज में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सोमवार 28 सितंबर की सुबह पांच बजे जहां बैराज से 5 लाख 43 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, वहीं मंगलवार 29 सितंबर की सुबह नौ बजे यह घटकर 1 लाख 91 हजार 200 क्यूसेक रह गया।

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यानी करीब 3 लाख 52 हजार 300 क्यूसेक की कमी आई है। इसके बावजूद दियारा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और ग्रामीणों की दुश्वारियां बरकरार हैं। बैराज के मंगलवार सुबह नौ बजे के आंकड़ों के अनुसार अपस्ट्रीम जलस्तर 356.70 फीट तथा डाउनस्ट्रीम जलस्तर 354.10 फीट दर्ज किया गया। पानी की निकासी कम होने के साथ नदी का जलस्तर लगातार धीरे धीरे नीचे आ रहा है, लेकिन बाढ़ का पानी अभी भी कई गांवों और संपर्क मार्गों पर जमा है।

वपुर, बसंतपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा, सालिकपुर और महादेवा समेत दियारा क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। कई परिवार घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। सालिकपुर और महादेवा के ग्रामीण चौकी के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग तथा बांध के किनारे शरण लिए हुए हैं।

प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य जारी है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कम्युनिटी किचन के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। पशुओं के चारे को लेकर पशुपालक भी परेशान हैं।

उधर, नदी, नाले और मोनी उफान पर हैं। तुर्कहां नाला, लक्ष्मीपुर-पडरहवा मार्ग, भगवानपुर सहित नौतार जंगल क्षेत्र की अधिकांश खेती पानी में डूबी हुई है। पानी का स्तर धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में जलभराव और आवागमन की समस्या के चलते ग्रामीणों की परेशानी अभी बनी हुई है। इसे सामान्य होने में अभी समय लगेंगे।

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