पडरौना/कुशीनगर। कहते हैं कि माता और पिता की तुलना में मां बच्चों के ज्यादा नजदीक होती है। लेकिन वह कैसी मां थी की उसके बेटे ने अपने ही मां के साथ रहने और जाने से इनकार कर दिया था ? बेटे ने साफ लहजे में कहा था कि वह अपने मां के साथ नही रहेगा,और नही ही वह अपने घर जाएगा। मामला इतना आगे बढ़ गया था कि कोतवाली पडरौना के पास पहुंच गया था।
कोतवाली पडरौना में सामने आए इस मसले में कई घंटे तक चले सुलह कराने की पुलिस कोशिश भी नकाम हो गई थी। लेकिन बात नहीं बनी तो बिनोद को पुलिस ने जहां रहने और खाने पीने में ही खुश था वहां भेज दिया था।
पडरौना तहसील क्षेत्र के जडार गांव निवासी रुना देवी ने वर्ष 2019 में कोतवाली पडरौना की पुलिस से शिकायत की थी,मेरे बेटे बिनोद को मेरे पास रहने के लिए पडरौना नगर से सटे परसौनी कला अनाथालय से वापस करा दिया जाए।
गौरतलब हो कि हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े पप्पू पांडेय ने वर्ष 2012- 16 मई को तत्कालीन डीएम आर सैंपल के पास बिनोद को लेकर पहुंचे थे। तब विनोद मात्र 6 वर्ष का ही था। हिंदू वाहिनी के नेता पप्पू पांडेय तत्कालीन डीएम आर सैंपल को बताया था कि छह साल के उम्र तक बिनोद की मां रूना देवी पत्नी स्वर्गीय राजेंद्र तिवारी गिरी के निधन के बाद पाला पोसा था। रुना ने मथौली बाजार निवासी सर्वजीत यादव उर्फ भक्कु से दूसरी शादी कर ली थी।मासूम बिनोद को भगवान के भरोसे छोड़ रुना पहले पति के निधन के बाद दुसरे पति सर्वजीत यादव उर्फ भक्कु के साथ रहने लगी थी। रुना देवी के द्वारा छोड़े गए उसके मासुस लाडले बिनोद को तब गांव वाले अपने रहमों करम पर जिंदा रखे रखा था। गांव वाले ने उस बच्चों को यदि वे उनके दरवाजे पर कुछ मांगने पहुंचता था। तो खाना खिला देते थे। गांव वालों ने इस मासूम बच्चे के बारे में 16 मई 2012 को हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े नेता पप्पू पांडेय से जानकारी दी थी। हिंदू युवा वाहिनी के नेता पप्पू पांडेय ने स्वयं गोद ले लिया था। इसके बाद तमाम अखबारों में आई खबर के बाद पुर्व डीएम आर सैंफिल ने संज्ञान में लेकर हिंदू युवा वाहिनी के नेता पप्पू पांडेय को उक्त बिनोद को मिलवाने के जिक्र किया। इस दौरान श्री पांडेय 6 वर्ष के बिनोद गिरि को तत्कालीन डीएम आर सैंफिल से उनके कार्यालय ले जाकर मिलाने का कार्य किया था। श्री पांडेय ने तत्कालीन डीएम आर सैंफिल को बताया था कि बिनोद के पिता स्वर्गीय राजेंद्र के नाम से गांव में बच्ची 11 डिसमिल जमीन को बिनोद की मां रूना देवी ने किसी के नाम से बैनामा कर दिया है। तत्कालीन डीएम आर सैंफिल ने मां और बिनोद की कहानी सुनकर द्रवित हो उठे थे। पुर्व डीएम ने बिनोद के पालन पोषण की जिम्मेदारी लेते हुए अपने जिम्में ले लिया था। उन्होंने बिनोद को पडरौना के पास अनाथ आश्रम चलाने वाली वासुमाता शिरीन के आश्रम में रखवाया दिया था। इतना ही नहीं पुर्व डीएम श्री सैंफिल ने बिनोद के परवरिश पर आने वाले खर्च को स्वयं उठाने की जिम्मेदारी लें ली थी। हालांकि बिनोद के मां के द्वारा बेचे गए जमीन उस समय पूर्व डीएम आर सैंफिल के प्रयास से विनोद के नाम से हो तो गई थी,मगर वह उस समय नाबालिक था,इसलिए उसके बालिग होने तक पूर्व डीएम ने जमीन की संरक्षिका के रूप में रुना का नाम दर्ज कराया था। हिंदू युवा वाहिनी के नेता पप्पू पांडेय की सारी बात सुनने के बाद पूर्व डीएम आर सैंफिल ने यह तय किया था कि बिनोद अब उनके संरक्षण में पलेगा।
उन्होंने उस समय अनाथालय की संरक्षिका बसुमाता सिरीन से कहा था कि विनोद की परवरिश में पढ़ाई लिखाई आदि का पूरा जिम्मा वे स्वयं ले रहे हैं। इसके बाद पूर्व डीएम ने सदर तहसीलदार को फोन कर निर्देश दिया था कि रुना देवी द्वारा किए गए बैनामा को तत्काल निरस्त करें। इसमें बिनोद की मां रूना देवी को नियमानुसार संरक्षिका है पर बिना परमिशन के किसी भी जमीन का बैनामा नहीं करा सकती है ? डीएम के पास पहुंचे विनोद की जानकारी होने और विनोद के अनाथ आश्रम में रहने की जानकारी होने पर उस समय बिनोद की मां रुना देवी ने कोतवाली पडरौना की पुलिस को पत्र देकर अपने लाडले बिनोद को परसौनी काला स्थित अनाथ आश्रम से वापस कराने की मांग की थी। लेकिन मामला जब मां बेटे का कोतवाली में पहुंचा तो पुलिस के लाख सुलह समझौता और प्रयास कराने के बाद भी बिनोद अपने मां पर ही तमाम तरह के आरोप लगाते हुए रुना देवी पास रहने से सीधे तौर पर मना कर दिया था। कोतवाली पुलिस ने विनोद को अनाथालय के संरक्षिका वासुमाता शिरीन के पास भेज दिया था। इन सबके बीच एक वर्ष पूर्व अनाथ आश्रम में महिला आयोग के सदस्य की जांच के दौरान पाई गई कमियों को लेकर अनाथालय बंद हो गई, और यहां मौजूद बिनोद के साथ अन्य बच्चों को लखनऊ के एक अनाथालय में भेज दिया गया था। उधर बिनोद की मां पडरौना सदर विधायक भाजपा मनीष जायसवाल मंटु से पुनः अपने बेटे बिनोद को अपने पास रखने के लिए गुहार लगाई थी।
इसमें सदर विधायक भाजपा मनीष जायसवाल मंटु के प्रयास से बारह साल के बाद विनोद अपने मां के साथ रहने को राजी हो गया। अपने घर ज़रार पहुंचे विनोद मां के साथ रह रहा है। इस सिलसिले में सदर विधायक मनीष जायसवाल मंटु के प्रतिनिधि और बड़े भाई संतोष जायसवाल ने बताया कि,बिनोद की मां रुना देवी ने अपने बेटे को घर लाने की मांग की थी,इसमें विधायक सदर मनीष जायसवाल मंटु जायसवाल और घनश्याम मोदनवाल साथ मेरे प्रयास से रुना देवी के बेटे को उनसे मिलवाने का कार्य किया गया। बिनोद कब कहां था,उसके पीछे क्या कहानी थी,न तो उन्हें जानकारी थी,न ही सदर विधायक जी को है।
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