पडरौना/कुशीनगर।मधुर साहित्य सामाजिक संस्था लक्ष्मीगंंज कुशीनगर की 103वीं कवि गोष्ठी वरिष्ठ कवि मधुसूदन पाण्डेय के आवास पर आर.के. भट्ट “बावरा” की अध्यक्षता में आयोजित हुई।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि अर्शी बस्तवी एवं विशिष्टअतिथि प्रसिद्ध हास्य व्यंग के कवि जगदीश खेतान रहे।
विद्या एवं संगीत की देवी सरस्वती मां के चित्र पर पूष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर गोष्ठी का प्रारंभ किया गया।
गोष्ठी की शुरुआत
उग्गम चौधरी द्वारा सरस्वती वंदना दियवा घिउवा में
जरवली दर्शन देद हो मईया से हुई।उक्त अवसर पर मधुसूदन पाण्डेय ने अपनी रचना चाह चहकत चांदनी संग कनखी निहार। नेति नियत चांल चलन अब से सुधार प्रस्तुत की।
देवेश पाण्डेय ने अपनी रचना नौकरी नहीं है, यह तो जिम्मेदारी है पढ़कर खूब वाहवाही बटोरी। जगदीश कुशवाहा ने सईयां
मिलल गजब देहाती, हम त खुद शहर की बिटिया सुनाया। वरिष्ठ कवि गोमल यादव ने सुनाया हिन्दी से है हिन्दुस्तान,ये भारत की है पहिचान प्रस्तुत किया।
कवि असलम
वैरागी द्वारा है तू नटखट नन्दलाल
मोहन मूरत सावरी सूरत नैन विशाल सुनाया।
दयानन्द सोनी ने अपनी रचना हमरा से भइल का कसूर,कि कइलू बेवफाई गोरिया पढ़ी।
जनपद के वरिष्ठ कवियों में से एक जगदीश खेतान ने अपनी एक पुरानी रचना बबुआ हो तू कबले होइब फेल,
अब हम ना पाईब तो है झेल सुनाया।
गोष्ठी की अगली कड़ी में युवा शायर आफताब आलम ने अपनी रचना कुछ लोग करते
प्यार का व्यापार हैं,
भोली-भाली लड़कियां इनकी शिकार हैं सुनाया। उर्दू के शायर अर्शी बस्तवी द्वारा शेर कहने वास्ते यारों खून जलाना पड़ता है,
और शायरी को निखारने के लिए दिन को रात बनाना पड़ता है सुनाया और खूब तालियां बटोरी।
आर.डी.एन.श्रीवास्तव ने भी अपनी रचना पढ़ी।
जनपद के वरिष्ठ कवि आर.के.भट्ट “बावरा” ने
तुझको देखा तो मुझको याद आया,
वो जमाना जमाने के बाद आया सुनाकर सबका दिल जीत लिया।
गोष्ठी का संचालन मधुसूदन पाण्डेय व अध्यक्षता आर.के.भट्ट “बावरा” ने किया। इस अवसर पर पंकज पांडेय,रजत सिंह, आराधना पाण्डेय, अजय सिंह,आदि श्रोतागण उपस्थित रहे।
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