पडरौना/कुशीनगर। अखंड सौभाग्य के लिए पारंपरिक रीति रिवाज के साथ गुरुवार को सुहागिनों ने करवा चौथ का व्रत किया। दिन भर बिना अन्न-जल ग्रहण किए व्रत के बाद रात में आठ बजे महिलाओं ने चंद्र दर्शन किया। चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूरा किया। पडरौना शहर सहित सभी क्षेत्रों में बुधवार को महिलाओं ने अखंड सौभाग्य के लिए करवाचौथ व्रत किया। पूरे दिन उपवास किया और शाम को नियमानुसार पूजा-अर्चना कर चंद्रदर्शन किया।
16 श्रृंगार में सजी महिलाओं ने सूर्योदय से व्रत शुरू किया। सुहाग के रक्षक भगवान गणेश को मन में धारण किया। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती महिलाओं को यह व्रत करने का अधिकार है। व्रत के पूजन में करवा, चिउड़ा, नया चावल, नए चावल का आटा, मूज, चलनी आदि का प्रयोग प्रमुख रूप से हुआ। सूर्यास्त के बाद चांद के निकलने पर व्रतियों ने चलनी में चांद का दीदार किया।
लगातार व्रत जरूरी: आचार्य पंडित आशुतोष मिश्रा कहते हैं कि करवा चौथ व्रत 12 वर्ष या 16 वर्ष तक लगातार रखा जाता है। अवधि पूरी होने पर इस व्रत का उद्यापन किया जाता है। कहते है जो सुहागिने इसे आजीवन रखना चाहती हैं उसे जीवन भर इस व्रत को रख सकती हैं। कहते हैं इस व्रत जैसा दूसरा सौभाग्यदायक व्रत दूसरा कोई नहीं होता।
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