कुशीनगर। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र सिर्फ एक महान कलाकार ही नहीं, बल्कि बड़े दिल वाले इंसान भी थे। यह बात उनके उन प्रशंसकों के लिए और भी सच है, जिन्हें उनसे निजी तौर पर मिलने और जुड़ने का सौभाग्य मिला। ऐसा ही एक भावुक रिश्ता कुशीनगर जनपद के सहजनवा स्थित डुमरी निवास गांव निवासी, एआरटीओ विभाग में वरिष्ठ लिपिक रहे तथा राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष हर्षवर्धन राज का रहा, जिनका धर्मेंद्र से लगभग 14 वर्षों का आत्मीय जुड़ाव था। अभिनेता के निधन से वे गहरे सदमे में हैं और उनकी आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।
भावुक स्वर में हर्षवर्धन राज बताते हैं कि वे हर वर्ष 8 दिसंबर को मुंबई जाकर धर्मेंद्र का जन्मदिन मनाते थे। केक काटने के बाद उनका आशीर्वाद लेकर ही वापस लौटते थे। लेकिन इस बार 8 दिसंबर को उनकी 90वीं जन्मतिथि वे नहीं मना सकेंगे। यह कहते हुए उनकी आंखें भर आती हैं। उन्होंने बताया कि जन्मतिथि से मात्र 14 दिन पूर्व धर्मेंद्र का असमय चला जाना उनके लिए बेहद दुखद है।
हर्षवर्धन राज के अनुसार यह अनोखा रिश्ता वर्ष 2010-11 में शुरू हुआ। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद वे लोनावला-खंडाला पहुंचे, जहां धर्मेंद्र का फार्म हाउस स्थित है। उत्सुकतावश वे वहां उनसे मिलने पहुंच गए, लेकिन उस समय धर्मेंद्र वहां मौजूद नहीं थे। तब उन्होंने एक पत्र लिखकर फार्म हाउस के कर्मचारियों से उसे अभिनेता तक पहुंचाने का अनुरोध किया। लगभग तीन महीने बाद वह पत्र धर्मेंद्र तक पहुंचा। पत्र पढ़कर अभिनेता इतने भावुक हुए कि उन्होंने तुरंत अपने सहयोगियों से कहा कि इस प्रशंसक को मुंबई बुलाया जाए।
इसके बाद हर्षवर्धन राज मुंबई पहुंचे और धर्मेंद्र से उनकी पहली संक्षिप्त मुलाकात हुई। समय बीतने के साथ अभिनेता उन्हें भूल भी गए, क्योंकि उनसे मिलने वालों की संख्या बहुत बड़ी होती थी। लेकिन जब अगली बार हर्षवर्धन 8 दिसंबर से पहले मुंबई पहुंचे और एक परिचित की मदद से अपना संदेश धर्मेंद्र तक पहुंचाया तथा खुद को ‘गोरखपुर से आया पत्र वाला प्रशंसक’ बताया, तो धर्मेंद्र ने उन्हें तुरंत पहचान लिया। इसके बाद अभिनेता ने अपने सहयोगियों से स्पष्ट निर्देश दिया कि जब भी हर्षवर्धन आएं, उनसे अवश्य मिलवाया जाए, क्योंकि वे बहुत दूर से चलकर आते हैं।
धीरे-धीरे यह सिलसिला हर साल की परंपरा बन गया। हर्षवर्धन हर वर्ष धर्मेंद्र के जन्मदिन पर मुंबई जाने लगे। इस दौरान उनकी जान-पहचान हेमा मालिनी, सनी देओल और बॉबी देओल से भी हो गई। हर्षवर्धन राज बताते हैं कि धर्मेंद्र जितने बड़े सितारे थे, उतने ही सरल, सहज और आत्मीय स्वभाव के भी थे। लखनऊ में उनकी अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ की शूटिंग के दौरान हर्षवर्धन अपने स्वजन और मित्रों के साथ उनसे मिलने पहुंचे थे। उस समय धर्मेंद्र ने सभी को स्वयं भोजन कराया, हंसी-खुशी के साथ फोटो खिंचवाए और स्नेहपूर्वक मुंबई आने का निमंत्रण भी दिया।
लेकिन किसे पता था कि यह मुलाकात अंतिम साबित होगी। अभिनेता के निधन की सूचना मिलते ही हर्षवर्धन राज भीतर से टूट गए। वे कहते हैं, “अगर ईश्वर उन्हें हमसे न छीनता, तो इस बार भी हम उनसे मिलने जाते। आज ऐसा लग रहा है, जैसे परिवार का कोई अपना सदस्य बिछुड़ गया हो। उनकी कमी अब जीवनभर महसूस होगी।”
इस तरह एक साधारण प्रशंसक और महान अभिनेता के बीच शुरू हुआ पत्र का यह रिश्ता वर्षों की आत्मीयता में बदल गया, जिसे आज धर्मेंद्र के निधन ने एक भावुक विराम दे दिया है।
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