खड्डा/कुशीनगर। महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान “ट्रस्ट” के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पाण्डेय के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को चन्द्रोदय ब्यापिनी में यह करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस वर्ष गुरुवार का दिन कृत्तिका नक्षत्र रात्रि तक रहेगी । सिद्धि योग पश्चात् व्यतिपात योग मिल रहा है। यह स्त्रियों का मुख्य व्रत व त्यौहार है। सौभाग्वती स्त्रियां अपने पति की रक्षार्थ यह व्रत करती हैं। रात्रि के समय भगवान शिव, चन्द्रमा, कार्तिकेय आदि के चित्रों व सुहाग की वस्तुओं की पूजा करती हैं। सबसे ऊपर चन्द्रमा उसके नीचे शिव उसके नीचे कार्तिकेय के चित्र दीवाल पर बनाकर उनका पूजन करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पाण्डेय बताते है की करवा चौथ के दिन निर्जला व्रत रहने का विधान है। सायं काल चन्द्रमा को अर्घ्य देकर बिना नमक का भोजन करें। पीले मिट्टी की गौरी जी का चित्र बनाकर उनकी पूजन करना चाहिए।
ॐ चं चन्द्रमसे नम:
ॐ शिवाय नमः
विशेष मंत्र-
ॐ षडमुखाय विद्महे मयूर वाहनाय धीमहि तन्नो कार्तिक प्रचोदयात्।
इन्ही मन्त्रों से निष्ठा पूर्वक पूजन करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जो स्त्रियाँ इस व्रत को निष्ठा पूर्वक करती हैं वह आजीवन सौभाग्वती बनी रहती हैं।
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