कुशीनगर। किसी भी पुलिस अधिकारी के कार्यकाल का सबसे अहम सवाल यही होता है कि आम आदमी की शिकायत सुनी कितनी गई और उसका समाधान हुआ कितना? कुशीनगर पुलिस के मामले में इसका एक आंकड़ा अगस्त 2026 के IGRS फीडबैक से सामने आया है।
राज्य स्तर पर जारी IGRS रिपोर्ट के अनुसार कुशीनगर पुलिस ने शिकायतों के निस्तारण में लगातार 11वीं बार प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। अगस्त में जिले की पुलिस से जुड़ी 1,957 शिकायतों पर फीडबैक लिया गया, जिसमें 97.17 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई से संतुष्टि जताई।
इस उपलब्धि में जिले के सभी 21 थानों की भूमिका रही। रिपोर्ट के अनुसार सभी 21 थानों ने 100 प्रतिशत रैंक हासिल की। SP केशव कुमार ने इसे पूरी टीम के सामूहिक प्रयास, अनुशासन और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिणाम बताया। IGRS को लेकर उन्होंने थाना प्रभारियों और जनपदीय IGRS सेल को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए थे।
लेकिन 97.17 प्रतिशत का मतलब पूरे जिले की राय नहीं यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे सही संदर्भ में देखना भी जरूरी है। 97.17 प्रतिशत संतुष्टि उन लोगों के फीडबैक का आंकड़ा है, जिनकी शिकायतें IGRS पर दर्ज हुईं और जिनसे फीडबैक लिया गया। इसे कुशीनगर की पूरी आबादी की राय नहीं माना जा सकता। फिर भी शिकायतों के निस्तारण और संबंधित शिकायतकर्ताओं के फीडबैक के लिहाज से यह पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आंकड़ा है। कुशीनगर पुलिस की उपलब्धियों में CCTNS रैंकिंग भी शामिल रही। फरवरी 2026 में जिले को 100 में 100 अंक मिलने और प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल करने की रिपोर्ट सामने आई थी।
एक तरफ अपराधियों पर कार्रवाई, इनामी बदमाशों की गिरफ्तारी, मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ अभियान और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग फ्रॉड का खुलासा है।
दूसरी तरफ विभाग के भीतर निलंबन, लाइनहाजिरी और अन्य कार्रवाई का सिलसिला है। और तीसरी तस्वीर IGRS की है—1,957 शिकायतें, 97.17 प्रतिशत संतुष्टि और लगातार 11वीं बार प्रदेश में पहला स्थान। इन आंकड़ों को एक साथ रखने पर SP केशव कुमार के एक वर्ष की पुलिसिंग की तस्वीर सामने आती है—अपराध पर कार्रवाई, विभागीय अनुशासन और शिकायत निस्तारण, तीनों मोर्चों पर लगातार सक्रियता।
हालांकि किसी भी पुलिस अधिकारी के कार्यकाल की पूरी तस्वीर आंकड़ों के साथ-साथ जमीनी अनुभव और नागरिकों की व्यक्तिगत शिकायतों को शामिल करके ही सामने आती है।
अब जनता की बारी थाने में आपकी शिकायत सुनी गई या नहीं?
पुलिस का व्यवहार कैसा रहा? शिकायत के बाद कार्रवाई समय पर हुई या नहीं? क्या आपके क्षेत्र में पुलिसिंग बदली है ,आंकड़े पुलिस की कहानी का एक हिस्सा बताते हैं, बाकी कहानी जनता के अनुभव से पूरी होगी।फिर जानने के लिए सीरियल (चार) पढ़िए..!!.
एक साल का कार्यकाल पूरा… अब सवाल आंकड़ों से आगे का है—क्या इन आंकड़ों का असर कुशीनगर के आम आदमी को जमीन पर भी महसूस हुआ ?
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