कसया/कुशीनगर। बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘सामयिक परिप्रेक्ष्य में शिक्षक : उत्तरदायित्व और चुनौतियां’ विषयक शिक्षक सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें शिक्षण की गुणवत्ता, चुनौतियां, नई शिक्षा नीति की उपलब्धियां, दायित्व, राष्ट्र निर्माण आदि विषयों पर विद्वानों ने चर्चा की व उपाय भी सुझाये।
मुख्यअतिथि डॉ बालमुकुन्द पाण्डेय ने कहा कि तुलसीदास ने श्रीराम चरित मानस में गुरु वंदना की है। देश के विकास में विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों का अहम योगदान है। शिक्षा सामाजिक दायित्व का कार्य है। शिक्षक का स्वाभिमानी होना अत्यन्त आवश्यक है। समाज में शिक्षकों का घटता हुआ सम्मान सबसे बड़ी चुनौती है और इस सम्मान को स्थापित करना हमारा दायित्व है। आचार्यों को भी अपने उत्तरदायित्वों की अनुभूति करना राष्ट्रनिर्माण के लिये अत्यन्त आवश्यक है।
महाविद्यालय के संयुक्त सचिव डॉ दयाशंकर तिवारी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि पेंशन शिक्षकों के सम्मान एवं जीवनयापन हेतु मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ विषय है। अध्यक्षता कर रहे। प्राचार्य डॉ सिद्धार्थ पाण्डेय ने कहा कि शिक्षक और शासन व्यवस्था दोनों शिक्षक और शिक्षक की वर्तमान स्थिति के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। आयोजक पूर्व प्राचार्य एवं भारतीय जनता पार्टी के जिला शिक्षक प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ अमृतांशु शुक्ल ने भारत के जिस इतिहास लेखन को बहुत पहले किये जाने की जरूरत थी, जिन बलिदानी वीरों को भारतीय इतिहास लेखन में बहुत पहले शामिल किया जाना चाहिये था, उसे अब किया जा रहा है और इसके सूत्रधार के रूप में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ बालमुकुन्द पाण्डेय की उपलब्धि महाविद्यालय के लिये गौरव का विषय है। संचालन डॉ निगम मौर्य ने किया व आभार डॉ विनोद कुमार सिंह ने व्यक्त किया। कार्यक्रम की शुरुआत माता सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर हुआ। मुख्य अतिथि व अतिथियों का स्वागत डा. शुक्ल ने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर किया।
कार्यक्रम में डॉ किरण जायसवाल, डॉ सीमा त्रिपाठी, डॉ रीना मालवीय, डॉ श्वेता यादव, डॉ सिद्धि केसरवानी, आचार्य डॉ गौरव तिवारी, डॉ राजेश कुमार, डॉ राघवेन्द्र प्रताप मिश्र, डॉ अनुज कुमार, डॉ रामभूषण मिश्र, डॉ सत्यप्रकाश, डॉ हरिशंकर पाण्डेय, डॉ राकेश कुमार राय, डॉ इन्द्रजीत मिश्र, डॉ रविशंकर प्रताप राव, डॉ रवि प्रताप पाण्डेय, डॉ विनोद सिंह, डॉ कौस्तुभ नारायण मिश्र, डॉ सत्येन्द्र गौतम, डॉ आमोद राय, डॉ उमाशंकर त्रिपाठी, डॉ कृष्ण कुमार जायसवाल, डॉ अजीत तिवारी, डॉ इन्द्रासन प्रसाद, डॉ शशिकान्त पाण्डेय, डॉ राजेश जायसवाल, डॉ त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी, डॉ रमेश विश्वकर्मा, डॉ सौरभ द्विवेदी आदि शिक्षक उपस्थित रहे।
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