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What is Shaligram rock/क्या होती है शालिग्राम शिला जिससे बनेगी राम-सीता की मूर्ति, जानें इसका धार्मिक महत्व

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Jan 31, 2023  |  12:55 PM

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What is Shaligram rock/क्या होती है शालिग्राम शिला जिससे बनेगी राम-सीता की मूर्ति, जानें इसका धार्मिक महत्व

अयोध्या के राम मंदिर का काम तेजी से चल रहा है. रामलला की प्रतिमा को लेकर भी लोगों में बहुत ही ज्यादा उत्साह दिख रहा है. अयोध्या के इस भव्य मंदिर में रामलला की मूर्ति शालिग्राम पत्थर से तैयार की जाएगी. ये शालिग्राम पत्थर नेपाल की गंडकी नदी से लाए जा रहे हैं. जानकारों के मुताबिक, ये पत्थर दो टुकड़ों में है और इन दोनों शिलाखंडों का कुल वजन 127 क्विंटल है. इन शिलाखंडों को 02 फरवरी तक अयोध्या लाया जाएगा.

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क्या है शालिग्राम पत्थरों की मान्यता

शास्त्रों के मुताबिक, शालिग्राम में भगवान विष्णु का वास माना जाता है. पौराणिक ग्रंथों में माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का जिक्र भी किया गया है. इसलिए इन शिलाखंडों को बहुत ही खास माना जा रहा है. लोगों के मुताबिक, इन शिलाखंडों का धार्मिक महत्व है. क्योंकि इनका संबंध भगवान विष्णु से है.

इन पत्थरों की सबसे महत्वपूर्ण बात है कि ये शिलाखंड ज्यादातर गंडकी नदी में ही पाए जाते हैं. हिमालय के रास्ते में पानी चट्टान से टकराकर इस पत्थर को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है और नेपाल के लोग इन पत्थरों को खोज कर निकालते हैं और उसकी पूजा करते हैं.

मान्यता के अनुसार, 33 तरीके के शालिग्राम होते हैं. शालिग्राम का पत्थर भगवान विष्णु के 24 अवतारों से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि जिस घर में शालिग्राम का पत्थर होता है, वहां घर में सुख-शांति बनी रहती है और आपसी प्रेम बना रहता है. साथ ही माता लक्ष्मी की भी कृपा बनी रहती है.

गंडकी नदी से निकली शालिग्राम शिला को देखेंगे विशेषज्ञ

शालिग्राम शिला का विशेष महत्व है. हालांकि अभी तकनीकी विशेषज्ञों का पैनल परीक्षण कर भव्य मूर्ति के लिए उसकी अनुकूलता और क्षरण जैसी बातों पर मंथन करेगा. जानकारी के अनुसार, प्रख्यात चित्रकार वासुदेव कामथ के अलावा रामलला की मूर्ति बनाने में पद्मभूषण शिल्पकार राम वनजी सुथार को जिम्मेदारी दी गई है. राम सुथार ने स्टैचू ऑफ़ यूनिटी का भी शिल्प तैयार किया है. हाल ही में अयोध्या में लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि स्वरूप वीणा को स्थापित किया गया है. उस वीणा को राम सुथार और उनके बेटे अनिल राम सुथार ने तैयार किया है.

वहीं मूर्ति बनाने के पहले चरण की ज़िम्मेदारी संभालने वाले चित्रकार वासुदेव कामथ अंतर्रराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हैं जिन्हें स्केच और पोर्ट्रेट बनाने में विशेष ख्याति प्राप्त है. इसके अलावा मूर्तिकार पद्मविभूषण सुदर्शन साहू, पुरातत्ववेत्ता मनइया वाडीगेर तकनीकी विशेषज्ञ और मंदिर बनाने वाले वास्तुकार भी मूर्ति के निर्धारण में भूमिका निभाएंगे. रामलला की मूर्ति ऐसी होगी जिसमें मंदिर के वास्तु की दृष्टि से समन्वय होगा. रामनवमी के दिन रामलला के ललाट पर सूर्य की किरणें पड़ेंगी.

शिलाओं से बनेगी रामलला की मूर्ति

रामलला की मूर्ति तैयार करने के लिए जिन मूर्तिकारों और कलाकारों का चयन किया गया है. रामलला की मूर्ति 5 से साढ़े 5 फीट की बाल स्वरूप की होगी. मूर्ति की ऊंचाई इस तरह तय की जा रही है कि रामनवमी के दिन सूर्य की किरणें सीधे रामलला के माथे पर पड़ें.

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