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पूर्वांचल में घर बनाना है तो अब ढीली करनी पडे़गी जेब, जानें बिहार के किस फैसले का हुआ असर

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Dec 21, 2020  |  3:29 PM

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पूर्वांचल में घर बनाना है तो अब ढीली करनी पडे़गी जेब, जानें बिहार के किस फैसले का हुआ असर

बिहार में 14 चक्का या उससे अधिक के भारी वाहनों पर गिट्टी और मौरंग-बालू के परिवहन पर सरकार की रोक के बाद पूर्वांचल में आशियाना बनाना महंगा हो गया है। इस आदेश से गोरखपुर-बस्ती मंडल के 2000 से अधिक भारी वाहन खड़े हुए हो गए हैं। संकट को देखते हुए पिछले 15 दिन में मौरंग-बालू की कीमत 70 से बढ़कर 100 रुपये प्रति घन फुट तक पहुंच गई है।

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15 दिन में 40 फीसदी बढ़ गईं कीमतें

बिहार सरकार ने बीते 16 दिसम्बर को बालू, गिट्टी के परिवहन को लेकर गजट जारी किया है। लेकिन इसका असर 15 दिन पहले से ही दिख रहा है। दिसम्बर महीने की शुरुआत में मौरंग-बालू करीब 70 रुपये घन फुट की दर से बिक रहा था, जो वर्तमान में 100 रुपये घन फुट तक पहुंच गया है।

90 फीसदी खपत की पूर्ति बिहार के खदानों से

गोरखपुर और बस्ती मंडल में मौरंग-बालू बिहार के डेहरी, कोइलवर और छपरा से आता है। प्रतिदिन करीब एक लाख घन फुट मौरंग-बालू की सिर्फ गोरखपुर में खपत है। अकेले गोरखपुर में रोज 100 ट्रक मौरंग-बालू की खपत है। इन ट्रकों में 750 से लेकर 1200 वर्ग फुट तक मौरंग-बालू लाया जाता है। बालू की 90 फीसदी खपत बिहार के खदानों से ही पूरी होती है। सिर्फ 10 फीसदी मौरंग-बालू मिर्जापुर, बांदा, हमीरपुर आदि के खदानों से आता है। बिहार से अब या तो छोटे ट्रकों में बालू आ रहा है या फिर खोनभद्र, बांदा और हमीरपुर से मौरंग-बालू की खेप आ रही है।

2000 से अधिक ट्रक खड़े हो गए

बिहार सरकार के निर्णय से गोरखपुर के 2000 से अधिक ट्रक खड़े हो गए हैं। तुर्राबाजार निवासी विनोद दूबे के पास चार ट्रक हैं। मौरंग-बालू का कारोबार थमने से उनके समक्ष बैंक की किस्त भरने का संकट खड़ा हो गया है। इसी तरह राप्ती नगर के दिलीप पाल के पास छह ट्रक हैं। उनका कहना है कि ‘हर महीने करीब चार लाख रुपये किस्त जमा करनी पड़ती है। मौरंग-बालू के कारोबार को लेकर ही ट्रक खरीदा था। रोक से मुश्किलें बढ़ गई हैं।’ यूपी ट्रक संचालक एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री का कहना है कि बिहार की सियासत के चलते भारी वाहनों पर रोक लगी है। कारोबारी ऑल इंडिया परमिट लेता है तो कोई राज्य खुद को कैसे अलग कर सकता है। वहां के अधिकारी ओवरलोडिंग पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं, तो उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए। सरकार ने आदेश नहीं बदला तो मौरंग बालू की कीमत 150 रुपये प्रति घन फुट तक पहुंच जाएगी।

बालू कारोबारी भी परेशान

बालू कारोबारी बताते हैं कि ‘14 चक्का ट्रक में 1000 घन फुट से अधिक बालू आता है, वहीं छोटे ट्रकों में 500 से 600 घन फुट बालू आता है। जबकि डीजल, टोल और ड्राइवर आदि का खर्च दोनों ट्रकों में बराबर ही होता है। एक ट्रक बालू बिहार से लाने में डीजल और अन्य मदों में करीब 20 से 22 हजार रुपये का खर्च आता है।’

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