खड्डा/कुशीनगर। खड्डा तहसील क्षेत्र में भगवान भाष्कर को भोर में अर्घ्य देने के लिए गुरुवार को घाट पर पहुंच कर व्रती महिलाओं ने पूजन स्थल पर वेदी सजा दी। गन्ने के मंडप में गीत गाते हुए छट्ठी मईया की विधिवत पूजा की। उन्हें चावल का पीला अच्छत, चंदन, पुष्प, सिंदूर से पूजकर नारियल, सेब, केला, नींबू, कच्ची, अमरूद, मूंगफली, आंवला, पपीता, मीठा ठेकुआ चढ़ाकर मिन्नतें मांगीं। महिलाएं घुटने भर पानी में खड़े होकर सूप में फल आदि लेकर सूर्यदेवता को अर्घ्य देने के लिए प्रस्तुत हुईं तो उनके पति ने दूध और जलधार गिराकर अर्घ्य में सहयोग दिया।…आवहु आवहु हे सुरुज देव! मानहु विनती हमार,… पूरी करहुं मनकामना हे छट्ठी मईया… आदि गीतों से पूजा समारोह स्थल का वातावरण आध्यात्मिक छटा बिखेर रहा था।
भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित करने के बाद महिलाएं पूजा मंडप में पुन: मां के सामने पहुंचीं। देवी के वेदी के सामने वस्तु रख आरती उतारी, प्रणाम कर मनवांछित फल मांगा। फिर पति के हाथों प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ इस परंपरा को निभाने में लगे रहे। खड्डा के जटाशंकर पोखरा, शुगर मिल के पास काफी भीड़ रही। नगर पंचायत के साथ तहसील प्रशासन ने प्रकाश के साथ पेयजल का बंदोबस्त किया था। सुरक्षा में खड्डा के पुलिस क्षेत्राधिकारी शिवाजी सिंह, एस एच ओ धनवीर सिंह, एस आई रमाशंकर यादव, राजेश यादव आदि पुलिसकर्मी क्षेत्र में मुश्तैद रहे। सूर्य उपासना का यह पर्व 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत करते हुए सूर्य देवता को अपनी श्रद्धा अर्पित करने वाले भक्तों ने कहा, हे छठी मईया फिर आना और अगले साल हमारी पूजा स्वीकार करना। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों का भी रहा।
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